साइबर ठगों के खिलाफ सरगुजा पुलिस का मास्टरप्लान! स्कूलों से शिक्षकों के घर तक पहुंची पुलिस, 2000 से ज्यादा बच्चों को बनाया ‘साइबर शिक्षक’

रक्षक बने साइबर शिक्षक – सरगुजा पुलिस की अनूठी पहल, स्कूलों और शिक्षकों के घर पहुंचकर 2000 से अधिक बच्चों को किया गया जागरूक।

सरगुजा : छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा चलाए जा रहे प्रदेशव्यापी ‘साइबर जागृति अभियान’ के तहत आज शिक्षक दिवस के अवसर पर जिला सरगुजा में एक विशेष और वृहद जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। ‘मैं हूँ साइबर शिक्षक – साइबर शिक्षा से ही साइबर सुरक्षा’ की थीम पर आधारित यह अभियान डीआईजी एवं एसएसपी सरगुजा राजेश अग्रवाल (भा.पु.से.) के कुशल दिशा-निर्देशन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री रितेश चौधरी के नेतृत्व में पूरी तत्परता के साथ चलाया गया।

ब्लैक बोर्ड पर सिखाए सुरक्षा के पाठः-

अभियान को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए सरगुजा जिला अंतर्गत समस्त थाना चौकी की पुलिस टीमों ने जिले के विभिन्न स्कूलों का दौरा किया। इतना ही नहीं, पुलिस टीम ने शिक्षकों के घरों पर भी दस्तक देकर उन्हें इस अभियान से जोड़ा। इस दौरान पुलिस अधिकारियों ने स्वयं कक्षाओं के ब्लैक बोर्ड पर साइबर अपराधों के प्रकार और उनसे बचाव के मुख्य तरीके लिखकर बच्चों को बेहद सरल और व्यावहारिक भाषा में समझाया।

लगभग 2000 बच्चों तक पहुंची सरगुजा पुलिसः-

इस विशेष मुहिम के तहत पुलिस टीम द्वारा लगभग 2000 स्कूली बच्चों को सीधे तौर पर जागरूक किया गया। बच्चों को ऑनलाइन गेमिंग फ्रॉड, सोशल मीडिया प्राइवेसी, अनजान लिंक पर क्लिक करने के खतरे और मजबूत पासवर्ड रखने के फायदों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। पुलिस ने बच्चों से अपील की कि वे अपने घरों में जाकर अपने माता-पिता और बुजुर्गों के भी ‘साइबर शिक्षक’ बनें।

डीआईजी एवं एसएसपी राजेश अग्रवाल (भा.पु.से.) ने इस अवसर पर कहा कि डिजिटल युग में बच्चों और युवाओं को सुरक्षित रखना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। अज्ञानता ही साइबर अपराधों का मुख्य कारण है; यदि बच्चे स्कूल के स्तर से ही सतर्क रहेंगे, तो समाज को साइबर ठगी से बचाया जा सकता है।

पुलिस टीम द्वारा स्कूलों के पहुंचकर निम्न महत्वपूर्ण साइबर अपराधों के सम्बन्ध में छात्र छात्राओं एवं शिक्षको कों जानकारी प्रदान की गई।

1. ऑनलाइन गेमिंग फ्रॉड :-

ठगी का तरीकाः बच्चे अक्सर फ्री फायर, बीजीएमआई या अन्य ऑनलाइन गेम्स खेलते हैं। जालसाज उन्हें मुफ्त गेमिंग कॉइन्स, स्किन्स, हथियार या करैक्टर दिलाने का लालच देकर उनके माता-पिता के बैंक खाते की जानकारी चुरा लेते हैं। कई बार गेमिंग चैट रूम्स में अनजान लोग दोस्ती बढ़ाकर बच्चों से पर्सनल डेटा मांग लेते हैं।

बचाव के उपायः

कभी भी किसी गेम में मुफ्त के लालच या किसी अनजान लिंक पर क्लिक करके पेमेंट न करें।

गेम खेलते समय माइक या चैट पर अनजान खिलाड़ियों को अपनी व्यक्तिगत जानकारी (जैसे- नाम, पता, स्कूल का नाम, या मोबाइल नंबर) न दें।

2. सोशल मीडिया और प्रोफाइल क्लोनिंग :-

ठगी का तरीका: अपराधी बच्चों की सोशल मीडिया से तस्वीरें चुराकर फर्जी प्रोफाइल बनाते हैं। कई बार इन तस्वीरों को मॉर्फ एडिट करके बच्चों को ब्लैकमेल किया जाता है और पैसे की मांग की जाती है।

बचाव के उपायः-

सोशल मीडिया पर अजनबी लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट कभी स्वीकार न करें।

अपनी प्रोफाइल को हमेशा ‘प्राइवेट’ मोड पर रखें और अनजान लोगों के साथ वीडियो कॉल करने से बचें।

3. फिशिंग और फर्जी लिंक्स :-

ठगी का तरीकाः व्हाट्सएप या एसएमएस पर आकर्षक ऑफर्स, मुफ्त गिफ्ट्स, स्कॉलरशिप या कूपन के नाम पर संदिग्ध लिंक्स भेजे जाते हैं। जैसे ही बच्चे इन पर क्लिक करते हैं, उनके फोन का डेटा हैक हो जाता है या बैंक खाते खाली हो जाते हैं।

बचाव के उपायः

किसी भी अनजान लिंक या पॉप-अप पर बिना जांचे क्लिक न करें।

लॉटरी या मुफ्त उपहार के झांसे में न आएं।

4. साइबर ग्रूमिंग और बुलिंग :-

ठगी का तरीकाः साइबर ग्रूमिंग में कोई अनजान व्यक्ति ऑनलाइन बच्चों से दोस्ती करता है, उनका भरोसा जीतता है और बाद में उनका शोषण या ब्लैकमेल करता है। साइबर बुलिंग में बच्चों को ऑनलाइन डराया-धमकाया या बदनाम किया जाता है।

बचाव के उपायः-

अगर ऑनलाइन कोई परेशान करे, तो डरे नहीं। डरकर अपनी गलती या फ्रॉड को छुपाने के बजाय तुरंत अपने माता-पिता या शिक्षकों को बताएं।

ऐसे व्यक्तियों को तुरंत ब्लॉक करें और उनके मैसेज का स्क्रीनशॉट लेकर रख लें।

5. ओटीपी और पासवर्ड फ्रॉड :-

ठगी का तरीका: साइबर ठग बैंक कर्मचारी, कूरियर बॉय या कोई अधिकारी बनकर फोन करते हैं और बच्चों से बातों-बातों में उनके माता-पिता के फोन पर आया OTP पूछ लेते हैं।

बचाव के उपायः-

अपना पासवर्ड या ओटीपी कभी भी किसी के साथ (चाहे वह कितना भी करीबी दोस्त क्यों न हो) साझा न करें। अपने खातों के लिए मजबूत और जटिल पासवर्ड का उपयोग करें।

अभियान के दौरान बच्चों को यह सिखाया जा रहा है कि यदि वे किसी भी प्रकार की ऑनलाइन ठगी के शिकार हो जाते हैं, तो घबराएं नहीं। सरकार के नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर इसकी शिकायत की जा सकती है, हेल्पलाइन नंबरः तुरंत वित्तीय ठगी होने पर 1930 पर कॉल करें साथ ही आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर जाकर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।

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