नवप्रवेशितों के स्वागत में सजा लोयोला महाविद्यालय कुनकुरी, नृत्य-गायन की प्रस्तुतियों ने बांधा समां : फादर मार्टिन मंगल तिर्की का प्रेरक संदेश—महाविद्यालय केवल डिग्री नहीं, चरित्र और भविष्य गढ़ने की प्रयोगशाला

सतरंगी सांस्कृतिक छटा और प्रेरणादायी संदेशों के बीच लोयोला महाविद्यालय कुनकुरी में हुआ नवप्रवेशितों का भव्य स्वागत

कुनकुरी : लोयोला महाविद्यालय कुनकुरी ने अपनी गौरवशाली और समृद्ध परंपरा का एक बार फिरस सफलता के साथ निर्वहन करते हुए शनिवार को अपने प्रांगण में नवप्रवेशित छात्र-छात्राओं का अत्यंत भव्य, स्नेहिल और भावमिश्रित स्वागत किया। महाविद्यालय का पूरा परिसर उल्लासमय वातावरण से आप्लावित नजर आया, जहाँ वरिष्ठ और कनिष्ठ विद्यार्थियों के बीच एक अनोखा अपनापन और आत्मीयता देखने को मिली।

अजनबी से अपनेपन का सफर: सतरंगी सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ

महाविद्यालय के लिए कनिष्ठ विद्यार्थी पूरी तरह नए और अनजान होते हैं, जिन्हें अकादमिक सफर की शुरुआत में स्टाफ और वरिष्ठ विद्यार्थियों के स्नेह, संबल और प्रोत्साहन की गहरी आवश्यकता होती है। इसी उद्देश्य के साथ आयोजित ‘सतरंगी स्वागत कार्यक्रम’ ने नवागंतुकों के मन से शुरुआती झिझक को पूरी तरह दूर कर दिया।

वरिष्ठ विद्यार्थियों ने नृत्य, गायन और वादन की विभिन्न विधाओं के माध्यम से ऐसा समां बांधा कि पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इन शानदार सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने न केवल नवागंतुकों का भरपूर मनोरंजन किया, बल्कि उनके प्रति स्नेह, उत्साह और आत्मीयता का खुला इजहार भी किया। इस जीवंत माहौल ने उपस्थित सभी प्राध्यापकों और विद्यार्थियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

चरित्र और भविष्य गढ़ने की प्रयोगशाला है महाविद्यालय: फादर मार्टिन मंगल तिर्की

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महाविद्यालय के उप प्राचार्य, श्रद्धेय फादर मार्टिन मंगल तिर्की ने नवप्रवेशितों के नाम एक अत्यंत प्रेरक पैगाम साझा किया। उन्होंने विद्यार्थियों को मार्गदर्शन देते हुए कहा, “महाविद्यालय केवल डिग्री हासिल करने की एक औपचारिक जगह नहीं है, अपितु यह हमारे चरित्र और स्वर्णिम भविष्य के निर्माण की जीवंत प्रयोगशाला है।”

उन्होंने युवाओं का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि विद्यार्थियों को अपनी गलतियों से कभी घबराना नहीं चाहिए, क्योंकि छोटी-छोटी गलतियाँ और असफलताएँ ही इंसान को पहले से कहीं अधिक बेहतर और मजबूत बनाती हैं। उन्होंने सभी से आपसी स्नेह, सद्भाव और परस्पर सम्मान के साथ अपनी शैक्षणिक यात्रा निरंतर जारी रखने और अपने परिवार, समाज तथा राष्ट्र की सेवा के लिए खुद को पूरी निष्ठा से तैयार करने का आह्वान किया।

सफलता के पांच अचूक सूत्र: प्राचार्य का मार्गदर्शन

कार्यक्रम के अंतिम चरण में, महाविद्यालय के प्राचार्य ने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए अत्यंत उपयोगी और व्यावहारिक दिशा-निर्देश साझा किए। उन्होंने जीवन और शिक्षा में शत-प्रतिशत सफलता प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित पांच बुनियादी और अनिवार्य तरीकों को अपनाने पर विशेष जोर दिया:

पढ़ें: विषय वस्तु को गहराई से पढ़ें और ज्ञान अर्जित करें।

समझें: केवल रटने के बजाय मूल अवधारणाओं को स्पष्ट करें।

प्रश्न पूछें: जिज्ञासा बनाए रखें और अपनी शंकाओं का समाधान करें।

चर्चा करें: साथियों और शिक्षकों के साथ संवाद स्थापित कर वैचारिक समझ को बढ़ाएं।

स्वयं अपनाएं: सीखी हुई बातों और आदर्शों को अपने आचरण व जीवन में उतारें।

प्राचार्य ने जोर देकर कहा कि विद्यार्थी जीवन की ऊँचाइयों को छूने और उत्कृष्ट सफलता प्राप्त करने के लिए ये पांच सूत्र अचूक अस्त्र की तरह काम करते हैं।

उल्लासमय वातावरण और सहभागिता

इस भव्य और गरिमामयी आयोजन में महाविद्यालय के सभी प्राध्यापक, अधिकारी-कर्मचारी तथा वरिष्ठ एवं कनिष्ठ विद्यार्थी पूरे समय अत्यंत प्रसन्नचित और उल्लसित मुद्रा में उपस्थित रहे। इस सफल आयोजन ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि लोयोला महाविद्यालय केवल उच्च शिक्षा का केंद्र ही नहीं, बल्कि एक ऐसा परिवार है जहाँ हर छात्र-छात्रा के सर्वांगीण विकास को सर्वोपरि रखा जाता है।

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