सुकमा के वनांचल की 10 वर्षीय बच्ची को मिली नई रोशनी, स्कूल जांच में पहचाना जन्मजात मोतियाबिंद, चिरायु के माध्यम से  जगदलपुर में हुआ सफल ऑपरेशन और उपचार.

बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं को प्रदेश के अंतिम छोर तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता अब दूरस्थ अंचलों के बच्चों के जीवन में भी बदलाव ला रही है। सेवा संकल्प अभियान के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, समय पर जांच और जरूरतमंद मरीजों को विशेषज्ञ उपचार से जोड़ने की इसी प्रतिबद्धता का उदाहरण सुकमा की एक दस वर्षीय छात्रा की कहानी है। कभी साफ देखने में परेशानी के कारण रोजमर्रा की गतिविधियों में दिक्कत झेल रही बच्ची का अब सफल उपचार हो चुका है।

सुकमा जिला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर वनांचल क्षेत्र की रहने वाली कक्षा 4 की इस छात्रा की पहचान राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (चिरायु) के तहत स्कूल में स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान हुई। जांच में बच्ची के जन्मजात मोतियाबिंद से पीड़ित होने की जानकारी सामने आई। परिवार की आर्थिक और अन्य परिस्थितियों के कारण उसका उपचार नहीं हो पा रहा था।

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बच्ची को आगे की जांच के लिए जिला अस्पताल सुकमा पहुंचाया। नेत्र विशेषज्ञ की जांच के बाद उसे उच्च संस्थान महारानी अस्पताल, जगदलपुर रेफर किया गया। वहां विशेषज्ञों की देखरेख में बच्ची का मोतियाबिंद का सफल ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के बाद करीब एक सप्ताह तक उसका नियमित फॉलोअप किया गया और आंखों की देखभाल, चश्मे के उपयोग, स्वच्छता तथा समय पर दवाइयां लेने के संबंध में परिजनों को आवश्यक समझाइश दी गई। इलाज के बाद बच्ची की देखने की क्षमता में सुधार हुआ है। उसके लिए यह बदलाव केवल आंखों की रोशनी लौटने तक सीमित नहीं है, बल्कि पढ़ाई जारी रखने और अपने भविष्य के सपने पूरे करने का भरोसा भी लौटा है।

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