मछली पालन में बड़ा बदलाव लाने की तैयारी! जशपुर के 300 किसानों ने सीखी आधुनिक तकनीकें—तालाब प्रबंधन, गुणवत्तापूर्ण बीज, संतुलित आहार और बीमारी नियंत्रण का मिला वैज्ञानिक प्रशिक्षण, केज कल्चर ने दिखाई नई संभावनाएं

मत्स्य किसानों को दिया गया वैज्ञानिक मछली पालन का प्रशिक्षण

नवीन तकनीकों की जानकारी के साथ पौंड लाइनर एवं केज कल्चर का कराया गया भ्रमण

जशपुर : मत्स्य पालन विभाग द्वारा जिले के समस्त विकासखंडों से चयनित समूह एवं समितियों से जुड़े 300 मत्स्य किसानों को मछली पालन की आधुनिक एवं वैज्ञानिक तकनीकों से अवगत कराने के उद्देश्य से तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को नवीन तकनीकों की जानकारी देने के साथ ही सफलतापूर्वक मछली पालन कर रहे क्षेत्रों का भ्रमण कराया गया। प्रशिक्षण के तहत मत्स्य किसानों को जशपुर जिले में पौंड लाइनर तकनीक के माध्यम से नवीन एवं आधुनिक पद्धति से किए जा रहे मछली पालन का प्रत्यक्ष अवलोकन कराया गया। किसानों ने पौंड लाइनर आधारित मत्स्य पालन की तकनीक, तालाब प्रबंधन एवं उत्पादन बढ़ाने के तरीकों की जानकारी प्राप्त की। इसके साथ ही किसानों को सरगुजा जिले के रजपुरी जलाशय का भ्रमण कराया गया, जहां केज कल्चर तकनीक के माध्यम से मछली पालन किया जा रहा है। इस दौरान किसानों को जलाशय आधारित केज कल्चर की कार्यप्रणाली एवं इसकी संभावनाओं से अवगत कराया गया।

 प्रशिक्षण के दौरान ब्लॉक स्तर के अधिकारियों एवं मत्स्य विभाग के विशेषज्ञों द्वारा किसानों को नवीन पद्धति से मत्स्य बीज उत्पादन, तालाब प्रबंधन, मछलियों के लिए संतुलित आहार प्रबंधन तथा मछलियों में होने वाली विभिन्न बीमारियों की पहचान और उनकी रोकथाम के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षण एवं भ्रमण के माध्यम से किसानों को व्यावहारिक जानकारी मिलने से वे अपने तालाबों में बेहतर प्रबंधन, गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज, उचित आहार व्यवस्था तथा बीमारी की समय पर रोकथाम जैसे उपाय अपना सकेंगे। इससे मछली उत्पादन में वृद्धि होने के साथ ही मत्स्य पालन से जुड़े हितग्राहियों की आय में भी बढ़ोतरी की संभावना है। प्रशिक्षण एवं भ्रमण कार्यक्रम सहायक संचालक मत्स्य पालन श्री जितेंद्र कुमार पैकरा के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।

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