जशपुर, 5 मई 2025 – राजनीति के अखाड़े में भाषा का संतुलन कब छूट जाता है, इसका ताजा उदाहरण बने अनुरंजन भगत, जिन्होंने गुस्से में मुख्यमंत्री और तहसीलदार पर शब्दों के हथौड़े चला दिए – लेकिन अब पश्चाताप की अग्नि में जलकर मांग रहे हैं सार्वजनिक माफी! राजनीति की दुनिया में शब्द तलवार बनते हैं, और जब वह तलवार नियंत्रण से बाहर हो जाए, तो सत्ता की दीवारें भी कांप जाती हैं। पत्थलगांव में भारत मुक्ति मोर्चा के मंच से जो ज्वाला फूटी, उसने न सिर्फ तहसीलदार की गरिमा पर…
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