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  • मिनीमाता महतारी जतन योजना महिला श्रमिकों के लिए वरदान साबित हो रही हैं, पंजीकृत 26 महिला श्रमिकों को 5 लाख 20 हजार रूपये की दी गई सहायता राशि.

    मिनीमाता महतारी जतन योजना महिला श्रमिकों के लिए वरदान साबित हो रही हैं, पंजीकृत 26 महिला श्रमिकों को 5 लाख 20 हजार रूपये की दी गई सहायता राशि.

    बच्चों के पालन-पोषण में राशि से मिलती है सहायता, हितग्राहियों ने छत्तीसगढ़ शासन को दिया धन्यवाद

    समदर्शी न्यूज ब्यूरो, जशपुर

    जशपुर : राज्य शासन द्वारा लागू मिनीमाता महतारी जतन योजना पंजीकृत महिला श्रमिकों के लिए लाभदायक है। इस योजना अंतर्गत पंजीकृत महिला निर्माण श्रमिकों को प्रसूति सहायता राशि के रूप में 20 हजार रूपये एकमुश्त देने का प्रावधान है। यह राशि महिला श्रमिकों को बच्चे के जन्म के पश्चात प्रदान की जाती है। इस योजना का लाभ पहले दो बच्चों के प्रसव के लिए दिया जाता है।

    इस तारतम्य में श्रम विभाग द्वारा जिले के 26 महिला पंजीकृत श्रमिकों को मिनीमाता महतारी जतन योजना का लाभ प्रदान करते हुए 20 हजार के मान से 5 लाख 20 हजार रूपए की सहायता राशि प्रदान की गई है। हितग्राही ने बताया कि छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल अंतर्गत रेजा प्रवर्ग में पंजीकृत महिला श्रमिक है। योजना के अंतर्गत सहायता राशि मिलने से कमजोर परिवार के लोगों को आर्थिक मदद और बच्चों के पालन-पोषण में सहयोग मिल रहा है। कमजोर परिवार के लोग जिनकी आय का जरिया मेहनत मजदूरी है, ऐसे परिवार के लिए श्रम विभाग की यह योजना कल्याणकारी है। इससे उन्हें अतिरिक्त आय की प्राप्ति होती है। लाभान्वित हितग्राही ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लोगों के कल्याणकारी योजना का संचालन करने हेतु मुख्यमंत्री भूपेश बघेल एवं छत्तीसगढ़ शासन को धन्यवाद दिया है।

    श्रम विभाग द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ लेने हेतु श्रम विभाग, लोक सेवा केन्द्र या व्हीएलई के माध्यम से दस्तावेजों के साथ पंजीयान करा सकते हैं, साथ ही अधिक जानकारी के लिए कल्याण अधिकारी श्री ज्ञानवंत पाण्डेय 7999257119 एवं कल्याण निरीक्षक श्री अभिषेक यादव 9111122448 से संपर्क कर सकते है।

  • कांसाबेल का स्वास्थ्य अमला गृह भेंट करके चिन्हांकित और पंजीकृत गर्भवती माताओं को इमरजेंसी संपर्क नम्बर की दे रहा जानकारी.

    कांसाबेल का स्वास्थ्य अमला गृह भेंट करके चिन्हांकित और पंजीकृत गर्भवती माताओं को इमरजेंसी संपर्क नम्बर की दे रहा जानकारी.

    गर्भवती माताओं को संस्थागत् प्रसव के लिए किया गया प्रोत्साहित, पौष्टिक भोजन लेने के लिए दी गई सलाह

    समदर्शी न्यूज ब्यूरो,जशपुर

    जशपुर : कांसाबेल विकासखण्ड के स्वास्थ्य विभाग का अमला गृह भेंट करके चिन्हांकित और पंजीकृत गर्भवती माताओं को संस्थागत् प्रसव कराने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है और आपातकालीन के समय में 102, 108 एवं अन्य इमरजेंसी संपर्क नम्बर भी दिया जा रहा है। ताकि गर्भवती माताएं तत्काल संपर्क करके नजदीक के स्वास्थ्य केन्द्र में पहुंचकर स्वास्थ्य लाभ ले सके। गृह भेंट के माध्यम से गर्भवती माताओं को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी भी दी जा रही है और पौष्टिक भोजन लेने के लिए सलाह भी दिया गया। भ्रमण के दौरान स्वास्थ्य विभाग के टीम के साथ आर.एच.ओ और मितानिन दीदी भी उपस्थित रही।

  • चिरायु टीम आंगनबाड़ी केन्द्र पहुंच कर नन्हें-मुन्हें बच्चों का कर रही है स्वास्थ्य परीक्षण, गंभीर बीमारी से प्रभावित बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही है उच्च अस्पतालों में ईलाज की सुविधा.

    चिरायु टीम आंगनबाड़ी केन्द्र पहुंच कर नन्हें-मुन्हें बच्चों का कर रही है स्वास्थ्य परीक्षण, गंभीर बीमारी से प्रभावित बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही है उच्च अस्पतालों में ईलाज की सुविधा.

    चित्रकला के माध्यम से किया जा रहा है बच्चों का बौद्धिक विकास

    समदर्शी न्यूज ब्यूरो,जशपुर

    जशपुर : स्वास्थ्य विभाग की चिरायु टीम आंगनबाड़ी केन्द्र में जा करके नन्हें-मुन्हें बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कर रही है और गंभीर बीमारी से प्रभावित बच्चों का पंजीयन करके उच्च अस्पतालों में ईलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

    इसी कड़ी में चिरायु टीम द्वारा फरसाबहार विकासखण्ड के आंगनबाड़ी केन्द्र मृगखोल, महकुलटोली और करवाटोली सेक्टर पुराईनबंध में स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। साथ ही आंगनबाड़ी केन्द्र में नन्हें-मुन्हें बच्चों को पौष्टिक आहार देने के साथ ही विभिन्न गतिविधियों में सम्मिलित किया जा रहा है। इसी प्रकार कांसाबेल विकासखण्ड के आंगनबाड़ी केन्द्र बड़ाईकटोली सेक्टर बगीया में चित्रकला के माध्यम से बच्चों का बौद्धिक विकास किया जा रहा है

  • वर्ल्ड नो टोबैको डे / विश्व तंबाकू निषेध दिवस 31 मई पर विशेष : डॉक्टरों, कैंसर पीड़ितों और जन स्वास्थ्य समूहों ने भारत सरकार से तंबाकू नियंत्रण कानूनों को मजबूत करने की अपील की

    वर्ल्ड नो टोबैको डे / विश्व तंबाकू निषेध दिवस 31 मई पर विशेष : डॉक्टरों, कैंसर पीड़ितों और जन स्वास्थ्य समूहों ने भारत सरकार से तंबाकू नियंत्रण कानूनों को मजबूत करने की अपील की

    तंबाकू की खपत और कैंसर के मामलों के प्रसार को कम करने के लिए तंबाकू नियंत्रण कानूनों की मजबूती जरूरी

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, रायपुर

    वर्ल्ड नो टोबैको डे (विश्व तंबाकू निषेध दिवस) के मौके पर डॉक्टर्स, जन स्वास्थ्य समूहों और कैंसर पीड़ितों ने सरकार से अपील की है कि तंबाकू नियंत्रण कानूनों को मजबूत करे ताकि तंबाकू की खपत और कैंसर के मामलों को मौजूदगी कम हो। संसदीय समिति की 139वीं रिपोर्ट की सिफारिश पर विचार करते हुए सरकार से यह मांग की गई है। इंडियन कौसिंल ऑफ मेडिकल रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया है कि कैंसर से पीड़ित भारतीयों की संख्या 2022 के मुकाबले 2025 में 26.7 मिलियन से बढ़कर 29.8 मिलियन होने की संभावना है।

    तंबाकू कैंसर का प्रमुख कारण है। मृत्यु के 6 से 8 प्रमुख कारणों के लिए तम्बाकू का उपयोग एक प्रमुख जोखिम कारक है और लगभग 40% गैर-संचारी रोग (एनसीडी) जिनमें कैंसर, हृदय-संवहनी रोग और फेफड़े के विकार शामिल हैं, सीधे तौर पर तम्बाकू के उपयोग के लिए जिम्मेदार हैं। छत्तीसगढ़ को ही लें  तो यहां 39.1 प्रतिशत लोग तंबाकू या तंबाकू उत्पादों का सेवन करते हैं।

    स्वास्थ्य और परिवार कल्याण पर संसद की स्थायी समिति की 139वीं रिपोर्ट, “कैंसर देखभाल योजना और प्रबंधन: रोकथाम, निदान, अनुसंधान और कैंसर उपचार की सामर्थ्य” राज्यसभा/लोकसभा में प्रस्तुत की गई।  समिति ने पाया कि भारत में, तंबाकू का उपयोग विभिन्न रूपों में, सभी कैंसर का लगभग 50% हिस्सा है। इन्हें तम्बाकू से संबंधित कैंसर कहा जाता है, इसलिए ये कैंसर रोके जा सकते हैं।

    समिति अपनी चिंता व्यक्त करती है कि जहां कैंसर के इलाज पर केंद्र और राज्य दोनों सरकारों द्वारा हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं, वहीं इसके मूल कारण यानी तंबाकू के सेवन पर वांछित ध्यान नहीं दिया जाता है। समिति को यह समझ में आया है कि तम्बाकू का नशा करने वाले ज्यादातर व्यसनी शुरुआत किशोरावस्था में करते हैं, यह सरकार को युवाओं द्वारा तम्बाकू सेवन की जाँच के उपायों पर ध्यान देने की सिफारिश करती है क्योंकि भारत में “छोड़ने की दर” बहुत कम है।

    देश में तंबाकू के सेवन को हतोत्साहित करने की तत्काल आवश्यकता है। तद्नुसार समिति सरकार से तम्बाकू नियंत्रण पर प्रभावी नीतियां बनाने की सिफारिश करती है। समिति की सिफारिश है कि सरकार को किशोर आबादी को तंबाकू की लत का शिकार होने से रोकने के लिए रणनीति तैयार करनी चाहिए।

    समिति ने रिपोर्ट में, उल्लेख किया है, कोटपा भारत में प्रमुख तंबाकू विरोधी कानून है जिसमें सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पर प्रतिबंध, विज्ञापन और प्रायोजन, नाबालिगों को बिक्री और पैक पर चेतावनी शामिल है। समिति ने आगे कहा कि भारत की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 ने 2025 तक तंबाकू के मौजूदा उपयोग के मुकाबले 30% की सापेक्ष कमी लाना निर्धारित किया है। समिति का मानना है कि एसडीजी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मंत्रालय को तंबाकू उत्पादों की बिक्री को रोकने के लिए प्रभावी उपाय करने चाहिए। समिति सरकार से सिफारिश करती है कि हवाई अड्डों, होटलों और रेस्त्रां में निर्दिष्ट धूम्रपान क्षेत्रों को समाप्त कर दिया जाए तथा संगठनों में धूम्रपान मुक्त नीति को प्रोत्साहित किया जाए। समिति सरकार से सिगरेट की खुली या बिना पैकेट एक या ज्यादा सिगरेट  की बिक्री पर रोक लगाने तथा अपराधियों पर कठोर दंड लगाने और जुर्माने की सिफारिश भी करती है।

    समिति की सिफारिशों की सराहना करते हुए, डॉ पंकज चतुर्वेदी प्रोफेसर और सर्जन, हेड एंड नेक सर्जरी विभाग, टाटा मेमोरियल सेंटर ने कहा, “यह वैज्ञानिक रूप से स्थापित है कि यदि किसी व्यक्ति को 21 वर्ष और उससे अधिक आयु तक तम्बाकू से दूर रखा जाता है, तो इस बात की बहुत अधिक संभावना है कि वह जीवन भर तम्बाकू से दूर रहेगा। कई देशों ने अब तंबाकू उत्पादों की बिक्री की न्यूनतम आयु 21 वर्ष बढ़ा दी है। तम्बाकू उत्पादों की बिक्री के लिए न्यूनतम कानूनी आयु को 18 वर्ष से बढ़ाकर 21 वर्ष करना और कोटपा 2003 में संशोधन करके धूम्रपान क्षेत्र/बिक्री विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाना, युवाओं को तम्बाकू से बचाने के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें नियमित धूम्रपान और तम्बाकू के उपयोग की शुरुआत तथा प्रगति को कम करने की क्षमता है।’

    “तंबाकू उत्पादों के सेवन से बच्चों, युवाओं और बड़े पैमाने पर जनता के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। तम्बाकू उत्पादों का अप्रतिबंधित और आकर्षक विज्ञापन उन भोले-भाले लोगों को आकर्षित करता है, जो इन व्यसनी उत्पादों के सेवन के प्रतिकूल परिणामों से अवगत नहीं हैं। प्रभावशाली दिमाग वाले बच्चों और युवाओं की सुरक्षा के लिए तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन पर व्यापक प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव एक स्वागत योग्य कदम है।” – भावना बी मुखोपाध्याय, मुख्य कार्यकारी, वालंट्री हेल्थ एसोसिएशन ऑफ इंडिया।

    आस-पास के लोगों के धूम्रपान से पीड़ित सुश्री नलिनी सत्यनाराय ने भी कैंसर पीड़ित के रूप में अपनी पीड़ा को आवाज दी है ताकि सेकेंड हैंड धुएं के कारण धूम्रपान न करने वालों की पीड़ा की ओर भी ध्यान आकर्षित किया जा सके। गले के कैंसर के इलाज से अब ठीक हो चुकी नलिनी ने अपील की,”सिगरेट के धुएं के संपर्क में आने से धूम्रपान नहीं करने वाले हजारों लोगों का जीवन जोखिम में होता है। होटल, रेस्तरां, बार, हवाईअड्डों में निर्धारित धूम्रपान क्षेत्र से सिगरेट के धुएं गैर-धूम्रपान वाले क्षेत्र में पहुंच जाते हैं और इससे कैंसर तथा फेफड़ों और हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए कोटपा अधिनियम में संशोधन की आवश्यकता है ताकि किसी भी परिसर में धूम्रपान की अनुमति नहीं दी जाए और सार्वजनिक स्वास्थ्य के सर्वोत्तम हित में इसे पूरी तरह से धूम्रपान मुक्त बनाना है।” 8 साल पहले इसकी बीमारी ठीक हुई। नलिनी का इलाज कर रहे डॉक्टर ने कारणों की पड़ताल करते हुए बताया कि उसके पति के धूम्रपान के कारण वह सेकेंड हैंड धुएं के संपर्क में आई होगी और इस कारण ऐसा हो सकता है।

    भारत में तंबाकू उपयोगकर्ताओं की संख्या दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी, 27 करोड़ है (ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे 2017 के अनुसार) और इनमें से 13 लाख से अधिक हर साल तंबाकू से संबंधित बीमारियों से मर जाते हैं। तम्बाकू के उपयोग से होने वाली बीमारियों की कुल प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लागत 182,000 करोड़ रुपये थी, जो भारत के सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 1.8% है। ग्लोबल यूथ टोबैको सर्वे के अनुसार, भारत में 13-15 वर्ष की आयु का लगभग पांचवां छात्र तंबाकू उत्पादों का उपयोग करता है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री द्वारा जारी किए गए इस राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण से पता चला है कि 38 प्रतिशत सिगरेट, 47 प्रतिशत बीड़ी और 52 प्रतिशत धूम्रपान रहित तंबाकू उपयोगकर्ताओं ने अपने 10वें जन्मदिन से पहले ही इसे आदत बना ली थी।

  • पाकरगांव में स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण समिति की बैठक हुई सम्पन्न : गर्भवती महिलाओं का शत प्रतिशत पंजीयन करने के दिए निर्देश

    पाकरगांव में स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण समिति की बैठक हुई सम्पन्न : गर्भवती महिलाओं का शत प्रतिशत पंजीयन करने के दिए निर्देश

    छत्तीसगढ़ भगिनी प्रसूति सहायता योजना के बारे में दी गई जानकारी

    समदर्शी न्यूज ब्यूरो, जशपुर

    जशपुर : पत्थलगांव विकासखण्ड के ग्राम पाकरगांव में विगत दिवस ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण समिति की बैठक सम्पन्न हुई। इस अवसर पर जनपद अध्यक्ष श्री सुकृत सिंह सिदार, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व श्री एस.लाल, खंड चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर जेम्स मिंज, ग्राम पंचायत सरपंच, जनप्रतिनिधि, बीसी एमटी, मितानिन एवं समस्त ग्रामवासी   उपस्थित थे।

    बैठक में गर्भवती महिलाओं का प्रथम तिमाही में ही पंजीयन, उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं की पहचान, चार बार ए.एन.सी जांच, सभी गर्भवती महिलाओं को आयरन, फोलिक एसिड एवं कैल्शियम टेबलेट का नियमित सेवन, नियमित टीकाकरण, कुष्ठ एवं टीवी खोज अभियान, शत प्रतिशत हाइड्रोसील, मोतियाबिंद स्क्रीनिंग, ऑपरेशन, एनीमिया, सिकलसेल नियंत्रण कार्यक्रम, डायरिया डिसेंट्री का नियंत्रण, सर्पदंश, खसरा, पीलिया के संबंध में जानकारी दी गई। इस दौरान स्थानीय बैगा गुनिया के माध्यम से झाड़-फूंक ना कराने व तत्काल अस्पताल पहुंचकर चिकित्सकीय इलाज हेतु निर्देशित किया गया। मलेरिया के रोक-थाम हेतु बरसात में पानी का जमा ना होने देना एवं मच्छरदानी का नियमित उपयोग हेतु सलाह दिया गया। छत्तीसगढ़ भगिनी प्रसूति सहायता योजना के संबंध में आम जनों को जानकारी देते हुए बताया गया कि योजना के अंतर्गत पात्र हितग्राही को 20 हजार की राशि श्रम विभाग द्वारा प्रदान किया जाता है। 

  • स्वास्थ्य विभाग की टीम ने न्यूजीलैंड में ऑकलैंड विश्वविद्यालय का भ्रमण कर विशेषज्ञों से की चर्चा : तंबाकू उत्पादों पर नियंत्रण की दिशा में कुशल रणनीतियों को विकसित करने की नीतियों पर ऑकलैंड विश्वविद्यालय ने अनुभव साझा किए

    स्वास्थ्य विभाग की टीम ने न्यूजीलैंड में ऑकलैंड विश्वविद्यालय का भ्रमण कर विशेषज्ञों से की चर्चा : तंबाकू उत्पादों पर नियंत्रण की दिशा में कुशल रणनीतियों को विकसित करने की नीतियों पर ऑकलैंड विश्वविद्यालय ने अनुभव साझा किए

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, रायपुर

    स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव के नेतृत्व में आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के अध्ययन दौरे पर गई स्वास्थ्य विभाग की टीम ने आज न्यूजीलैंड के ऑकलैंड विश्वविद्यालय (यूओए) का भ्रमण कर विशेषज्ञों से चर्चा की। टीम ने वहां स्वास्थ्य सेवा प्रदायगी के परिमाणों व गुणवत्ता प्रबंधन, स्वास्थ्य विज्ञान तथा व्यवहार विज्ञान के साथ तंबाकू मुक्त जीवनशैली के संबंध में जानकारियों का आदान-प्रदान किया। बहुसंख्यक आबादी तक बेहतर स्वास्थ्य सेवा प्रदायगी के लिए नवीन तकनीकों की खोज व अस्पताल प्रबंधन के साथ समन्वय स्थापित कर लोक स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में संसाधनों और कुशल रणनीतियों को विकसित करने की नीति पर भी दोनों देशों के अधिकारियों ने अनुभव साझा किए। ऑकलैंड विश्वविद्यालय सार्वजनिक शोध विश्वविद्यालय है और न्यूजीलैंड के प्रमुख विश्वविद्यालयों में से एक है। अकादमिक प्रतिष्ठा से संबंधित क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में यह दुनिया के 100 शीर्ष विश्वविद्यालयों में शामिल है। 

    तंबाकू नियंत्रण से संबंधित नीतियों को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने पर हुई चर्चा

    स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री टी.एस. सिंहदेव ने आकलैंड विश्वविद्यालय में प्रदेश को तंबाकू मुक्त बनाने में आ रही चुनौतियों तथा तंबाकू उत्पादों के नियंत्रण की दिशा में उठाए गए विभिन्न सामजिक पहलुओं पर विशेषज्ञों के साथ विस्तृत चर्चा की। स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री प्रसन्ना आर. ने तंबाकू नियंत्रण से संबंधित नीतियों व कार्यक्रमों को भविष्य में और अधिक प्रभावी तरीके से लागू करने एवं इसके सेवन से लगातार बढ़ रहे रोगियों की संख्या से अर्थव्यवस्था पर पड़ते बोझ पर विस्तृत विचार-विमर्श किया। विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने वहां किए गए शोध के आधार पर बताया कि तंबाकू उत्पादों से अर्जित आय से अधिक खर्च इससे होने वाली बीमारियों में हो रहा है। इसे देखते हुए न्यूजीलैंड सरकार ने तंबाकू पर रोक के लिए बहुत ठोस नीति बनाई है। विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने वहां स्मोक-फ्री जनरेशन की दिशा में उठाए गए क़दमों की जानकारी दी। तंबाकू और धूम्रपान पर नियंत्रण के लिए वहां सामुदायिक स्तर पर बिहेवियर चेंज कम्युनिकेशन पर बल दिया गया है।

    अधिकारियों ने बताया कि न्यूजीलैंड में किस तरह से तंबाकू के विक्रय को नियंत्रित करने के साथ ही इससे जुड़े उत्पादों में निकोटीन की मात्रा घटाई गई। धूम्रपान मुक्त पीढ़ी तैयार करने के लिए वहां 2009 या उसके बाद जन्मे किसी भी व्यक्ति के लिए तंबाकू उत्पाद के उपयोग/उपभोग/विक्रय को अवैध करार दिया गया है। उन्होंने तंबाकू उत्पादों के लिए लाइसेंस पद्धति और अल्टरनेट कल्टीवेशन पर काम करने की आवश्कता पर बल दिया। ऑकलैंड विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने वर्ष 2025 तक न्यूजीलैंड के स्मोक-फ्री जनरेशन हो जाने की बात कही। स्वास्थ्य सेवाओं के संचालक श्री भीम सिंह, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संचालक श्री भोसकर विलास संदिपान, राज्य नोडल अधिकारी डॉ. कमलेश जैन, ऑकलैंड विश्वविद्यालय के प्रो. क्रिस बुलेन, सह-प्राध्यापक प्रो. नताली वॉकर, डॉ. रोड्रिगो और डॉ. वर्तिका शर्मा भी चर्चा के दौरान मौजूद थीं।

    तंबाकू उत्पाद सेहत व समाज दोनों के लिए हानिकारक –टी.एस. सिंहदेव

    स्वास्थ्य मंत्री श्री टी.एस. सिंहदेव ने 31 मई को तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर कहा कि तंबाकू से न केवल इसका सेवन करने वाला व्यक्ति बल्कि उसके आसपास रहने वाले लोग भी प्रभावित होते हैं। तंबाकू सेवन से सेहत पर होने वाले खतरनाक प्रभाव के प्रति जागरूकता फैलाने और छत्तीसगढ़ में तंबाकू सेवन को निम्नतम करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि प्रदेश को जल्द से जल्द तंबाकू मुक्त प्रदेश की श्रेणी में अग्रिम पंक्ति में लाया जा सके। उन्होंने कहा कि समाज में तम्बाकू एवं धूम्रपान के सेवन की बढ़ती प्रवृत्ति की रोकथाम के लिए तम्बाकू उत्पादों के हानिकारक प्रभाव से समाज को अवगत कराने की जरूरत है। तंबाकू सेवन से होने वाली गंभीर बीमारियों के प्रति लोगों को जागरूक कर इसके उपयोग को बन्द करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

  • गर्भावस्था में खून के थक्के जमने की बीमारी थ्रोम्बो एम्बोलिक में लो मॉलिक्युलर वेट हेपरिन कारगर : पं. जवाहर लाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय में गर्भवती एवं प्रसूति के लिए आधारभूत गहन चिकित्सा देखभाल पर आधारित दो दिवसीय कार्यशाला का समापन

    गर्भावस्था में खून के थक्के जमने की बीमारी थ्रोम्बो एम्बोलिक में लो मॉलिक्युलर वेट हेपरिन कारगर : पं. जवाहर लाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय में गर्भवती एवं प्रसूति के लिए आधारभूत गहन चिकित्सा देखभाल पर आधारित दो दिवसीय कार्यशाला का समापन

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, रायपुर

    प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग तथा एनेस्थीसिया एवं क्रिटिकल केयर विभाग के संयुक्त तत्वावधान में डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय के टेलीमेडिसिन हाल में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के अंतिम दिन चिकित्सा महाविद्यालय की अधिष्ठाता डॉ. तृप्ति नागरिया ने बताया कि महिलाओं में वेजाइनल डिलीवरी के दौरान शिशु को चोट न लगे इस बात का ध्यान रखना चाहिए। इसके लिए उन्होंने जच्चा-बच्चा के कृत्रिम मॉडल के जरिये सुरक्षित प्रसव कराने के सही तरीकों के बारे में प्रतिभागियों को जानकारी दी। 

    वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. आशा जैन ने ”गंभीर रूप से बीमार गर्भवती महिलाओं के गर्भस्थ शिशु के स्थिति की जांच’’ विषय पर कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि जब भी बच्चादानी में संकुचन होता है तो शिशु की धड़कन बढ़ती है किंतु संकुचन हटते ही यह सामान्य हो जाती है। जब धड़कन बढ़ने की बजाय घटने लगे तो यह गर्भस्थ शिशु की गंभीर स्थिति को दर्शाता है। ऐसे में जल्द ही सिजेरियन डिलीवरी कर शिशु को बचाया जा सकता है। उन्होंने एंटीनेटल सीटीजी यानी गर्भावस्था में शिशु के हृदय गति के सम्बन्ध में कार्डियोटोकोग्राफी के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

    नई दिल्ली से आये मेहमान प्रवक्ता डॉ. सिमांत कुमार झा एवं डॉ. प्रफुल्ल अग्निहोत्री ने बताया कि कई बार प्रसव के तुरंत बाद प्रसूता की मौत हो जाती है। अचानक होने वाली ऐसी घटना में मृत्यु के कारणों का पता नहीं चल पाता जबकि इसका कारण गर्भावस्था में थ्रोम्बोएम्बोलिक रोग भी हो सकता है। गर्भावस्था के दौरान थ्रोम्बोएम्बोलिज्म का रिस्क सामान्य महिलाओं की तुलना में ज्यादा होता है। वह इसलिए क्योंकि बच्चादानी शरीर की वेनकेवा (शरीर की बड़ी नस जो शरीर के अन्य क्षेत्रों से हृदय तक रक्त पहुंचाती है) पर दबाव डालती है जिससे खून का प्रवाह कम हो जाता है। इसके साथ ही रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया भी गर्भावस्था में हार्मोन के प्रभाव से असंतुलित हो जाती है। ऐसे में थ्रोम्बोलिज्म की स्थिति निर्मित होने से गर्भवती एवं प्रसूता के मृत्यु की संभावना बढ़ जाती है। गर्भावस्था की बढ़ती हुई तिमाही के दौरान इसके रिस्क बढ़ने लगते हैं। आजकल मेडिकल साइंस की तरक्की की बदौलत गर्भावस्था की इस समस्या को एडवांस दवाईयां जैसे लो मॉलिक्युलर वेट हेपरिन (एल.एम.डब्ल्यू.एच./कम आणविक भार हिपेरिन) नामक खून को पतला करने की दवाई देकर नियंत्रित किया जा सकता है।

    विभागाध्यक्ष स्त्री रोग विभाग डॉ. ज्योति जायसवाल ने बताया कि गर्भवतियों में होने वाले थ्रोम्बोलिज्म के लिए दवाओं के ज्यादा विकल्प नहीं होते इसलिए लो मॉल्यूक्युलर वेट  हेपरिन   ही दिया जा सकता है। इसको देते समय इस बात का ध्यान भी रखना पड़ता है कि गर्भवती महिला के रक्त में प्लेटलेट्स की संख्या 75 हजार से ऊपर होनी चाहिए।

    मातृ मृत्यु दर एवं हृदयाघात विषय पर चिकित्सा महाविद्यालय के एनेस्थेसिया एवं क्रिटिकल केयर की प्रोफेसर डॉ. जया लालवानी ने एवं एक्यूट किडनी इंजरी पर डॉ. सरिता रामचंदानी ने भी कार्यशाला को संबोधित किया। डॉ. ज्योति जायसवाल के अनुसार गर्भवती एवं प्रसूताओं के गहन चिकित्सा देखभाल की दिशा में यह कार्यशाला सभी मेडिकल स्टूडेंट एवं प्रोफेशनल्स के लिए काफी उपयोगी साबित होगा। कार्यशाला की निदेशक पं. जवाहर लाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय की अधिष्ठाता एवं वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. तृप्ति नागरिया रहीं जबकि समन्वयक डॉ. जया लालवानी एवं डॉ. ज्योति जायसवाल रहीं।

  • जिला चिकित्सालय जशपुर में थायरॉइड से ग्रसित मरीजों का किया गया परीक्षण, चिन्हांकित 3 मरीजों का किया जाएगा ऑपरेशन

    जिला चिकित्सालय जशपुर में थायरॉइड से ग्रसित मरीजों का किया गया परीक्षण, चिन्हांकित 3 मरीजों का किया जाएगा ऑपरेशन

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, जशपुर

    जिला प्रशासन के द्वारा दूरस्थ अंचल क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए मैगा हैल्थ कैम्प, कुष्ठ निवारण शिविर सभी विकासखण्डों में स्वास्थ्य शिविर लगाकर गंभीर बिमारी, सामान्य बिमारी एवं अन्य प्रकार के बिमारियों का भी बेहतर ईलाज किया जा रहा है। गंभीर मरीजों को प्रशासन द्वारा रायपुर के बड़े अस्पतालों में भेजा जा रहा है और विशेषज्ञों के देखरेख में सफल ऑपरेशन भी करवाया गया है।

    इसी कड़ी में 29 मई 2023 को जिला चिकित्सालय जशपुर में थायरॉइड बीमारी से ग्रसित मरीजों को परीक्षण किया गया। सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. भूपेश भगत के द्वारा परीक्षण में थायराईड के 03 मरीजों का जिला चिकित्सालय में ऑपरेशन के लिए चिन्हांकित किया गया है और सर्जनी के पूर्ण की जाने वाली विभिन्न जांच पूर्ण कराने के लिए कहा गया है। पूर्व शिविर में उक्त मरीजों का घेंघा रोग सर्जरी के लिए चिन्हांकित किया गया था। मरीजों के लिए जांच एवं ईलाज निःशुल्क है।

  • तहसीलदार ने पाकरगांव और लुड़ेग के पशु चिकित्सालय का किया निरीक्षण, पशुओं का समय पर किया जा रहा टीकाकरण

    तहसीलदार ने पाकरगांव और लुड़ेग के पशु चिकित्सालय का किया निरीक्षण, पशुओं का समय पर किया जा रहा टीकाकरण

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, जशपुर

    पत्थलगांव तहसीलदार ने पाकरगांव और लुड़ेग के पशु चिकिल्सालय का निरीक्षण करके पशुओं के लिए दी जाने वाली सुविधाओं का अवलोकन किया। उन्होंने जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों से चर्चा करके पशुओं के टीकाकरण, पशु चिकित्सकों सेवाओं के बारे जानकारी ली। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने जानकारी देते हुए बताया कि चिकित्सकों द्वारा अच्छा कार्य किया जा रहा है। पशुओं को टीकाकरण का कार्य भी समय पर किया जा रहा है।

  • सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पत्थलगांव में मोतियाबिंद के मरीजों की हुई जांच, 26 मरीजों का हुआ सफल ऑपरेशन

    सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पत्थलगांव में मोतियाबिंद के मरीजों की हुई जांच, 26 मरीजों का हुआ सफल ऑपरेशन

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, जशपुर

    कलेक्टर डॉ. रवि मित्तल के निर्देशानुसार विकासखण्ड स्तर में मोतियाबिंद मरीजों की जॉच के पश्चात आवश्यकतानुसार निःशुल्क दवाई एवं तत्काल चश्मा वितरण किया जा रहा है साथ ही चिन्हांकित मरीजों के लिए ऑपरेशन की व्यवस्था की जाती है।

    इसी कड़ी में 29 मई 2023 को पत्थलगांव विकासखण्ड के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में मोतियाबिंद मरीजों का जांच कर 26 मरीजों का ऑपरेशन किया गया और निःशुल्क दवाई, आवश्यक परामर्श और चश्मा दी गई। शिविर में कोरबा के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. रामकिशोर शांडिल्य, डॉ. अनीता मिंज एवं  पत्थलगांव के बीएमओ डॉ. जे मिंज, नेत्र सहायक अधिकारी दिनेश दिनकर, श्रीमती सुनीता नाग, एवं चंदा दास ने अपनी सेवाएं दी।