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  • महारानी अस्पताल में पिग टेल पाइप कैथेराइजेशन के जरिए पहली बार मरीज का हुआ उपचार, सोनोग्राफी और पाइप के जरिए युवक के लिवर से निकाला गया मवाद

    यह सुविधा फिलहाल रायपुर और बिलासपुर जैसे बड़े शहरों में ही उपलब्ध

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, जगदलपुर

    जगदलपुर के महारानी अस्पताल में पिग टेल पाइप कैथेटराइजेशन की शुरुआत के साथ स्वास्थ्य सुविधाओं के दृष्टिकोण से एक नए अध्याय की शुरुआत हुई है, जहां सर्जरी योग्य गंभीर बीमारियों का  बिना सर्जरी के ही संभव हो गया है। ज्ञात जानकारीनुसार छत्तीसगढ़ की सरकारी चिकित्सा संस्थाओं में से डॉ अंबेडकर भीमराव अंबेडकर अस्पताल रायपुर, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान रायपुर एवं छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान बिलासपुर जैसी बड़ी बड़ी अस्पतालों में सोनोग्राफी द्वारा पिग टेल पाइप प्रक्रिया सामान्य तौर से की जाती है। महारानी अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ संजय प्रसाद ने बताया की सोनोग्राफी द्वारा पिग टेल पाइप प्रक्रिया की सुविधा संभाग में सबसे पहले उपलब्ध कराना  महारानी अस्पताल के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। संभवतः छत्तीसगढ़ के जिला चिकित्सालय स्तर पर रेडियोलॉजी विभाग में पिग टेल पाइप द्वारा मवाद निकालने की प्रक्रिया सर्वप्रथम महारानी अस्पताल जगदलपुर में की गई है। सरकारी संस्थाओं से अलग निजी संस्थाओं में यह प्रक्रिया बहुत ही महंगी होती है।  यह बहुत ही उन्नत तकनीकी प्रक्रिया है जो की अब बस्तरवासियो को सहजता से कम से कम खर्चे में महारानी अस्पताल में उपलब्ध हो जाएगी।

    बकावंड विकासखंड के 20 वर्षीय एक ऐसे ही युवक का सफल उपचार महारानी अस्पताल में किया गया, जिसके लिवर में मवाद भर गया था। 9 जून को अस्पताल में भर्ती युवक की सोनोग्राफी के दौरान रेडियोलॉजिस्ट डॉ मनीष मेश्राम द्वारा देखा गया कि लिवर में लगभग एक पाव मवाद है।सर्जन डॉ दिव्या तथा रेडियोलॉजिस्ट डॉ मेश्राम द्वारा इस युवक के लिवर का मवाद सोनोग्राफी के और पतले पाइप के माध्यम से निकाला गया।

    आमतौर पर शरीर के किसी अंग में मवाद भरने पर अंग के खराब होने तक की नौबत आ जाती है। ऐसे में हमारे शरीर के बहुमूल्य अंग को बचाने हेतु मवाद को बाहर निकालना एवं उसका उपचार करना लाज़मी हो जाता है । डॉ दिव्या (सर्जन) बतातीं है की ऐसे मवादो की अधिक मात्रा को बाहर निकालने के लिए ऑपरेशन का सहारा लेना पड़ता है, जिसमे पेट में चीरा लगाकर उक्त अंग तक पहुंचा जाता है और मवाद निकालने की प्रक्रिया की जाती है। मरीज़ की शारीरिक अवस्थानुसार इस प्रक्रिया में कई बार साइड इफेक्ट भी देखने को मिलता है, किंतु अब सोनोग्राफी की आधुनिक पद्धति पिग टेल पाइप से केवल एक छोटी सी छिद्र करके पतली पाइप द्वारा मवाद को बाहर निकाला जा सकता है। यह प्रक्रिया इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी के अंतर्गत आती है।

    इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी वर्तमान समय में चिकित्सा विभाग की अत्यधिक उन्नत, विशेष कुशलता एवं गुणवत्ता युक्त शाखा है ।  इसमें सीटी स्कैन एवं सोनोग्राफी की सहायता से शरीर की विभिन्न बीमारियों का इलाज केवल एक पतली पाइप ही की सहायता से कर दिया जाता है। इसमें सीटी स्कैन द्वारा दिमाग, पेट, हाथ या पैरों के रक्त की नसों की विभिन्न बीमारियों तथा सोनोग्राफी द्वारा पेट के विभिन्न बीमारियों का इलाज किया जाता है।

    आरंभ में सोनोग्राफी का उपयोग केवल बीमारी का पता लगाने के उद्देश्य से ही किया जाता था किंतु बाद की निरंतर विकास की धारा से सोनोग्राफी का उपयोग कुछ बीमारियों जैसे अंगों में भरे मवाद, गुर्दे में पेशाब रूक जाना, यकृत में या पित्त की नली में रुकावट से पित्त न निकल पाने के इलाज के लिए उपयोग में करने की प्रक्रिया अपनाई गई। शरीर के भीतर मवाद होने की पहचान सहजता से उपलब्ध सोनोग्राफी द्वारा शीघ्रता से की जा सकती है तथा उन्नत पद्धति से सोनोग्राफी के ही द्वारा केवल एक पतली पाइप के माध्यम से भीतरी अंगो से मवाद को लोकल एनेस्थेसिया देकर एक छोटी सी छिद्र करके निकल लिया जाता है। इस प्रक्रिया को पिग टेल कैथेटराइजेशन कहते हैं। इस प्रक्रिया के लिए सोनोग्राफी की बहुत ही अच्छी ज्ञान एवं तजुर्बा होने की आवश्यकता होती है ताकि पाइप के सिरे को सटीक तौर पर बिना किसी अन्य अंग या नसों को नुकसान पहुंचाए, मवाद में ही ले जाया जा सके और मवाद बाहर निकाला जा सके।

    सोनोग्राफी बहुत ही सहजता से उपलब्ध हो जाती है एवम इसके खर्चे भी बहुत कम होते है । पिग टेल से मवाद निकलने हेतु लोकल एनेस्थेसिया दिया जाता है जिसमे एनेस्थीसिया विशेषज्ञ की ज़रूरत नही पड़ती। इसमें मरीज को बेहोश नही किया जाता। मरीज़ सचेत अवस्था में ही रहते है और उन्हें ज्यादा किसी दर्द का अहसास भी नहीं होता। पिग टेल पाइप की प्रक्रिया बहुत ही कम समय में पूरी हो जाती है।

  • मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना से 5 मरीजों को मिली सहायता, राज्य के पात्र परिवारों को अधिकतम 20 लाख रूपए तक के इलाज की सुविधा की जाती है प्रदान

    मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना से 5 मरीजों को मिली सहायता, राज्य के पात्र परिवारों को अधिकतम 20 लाख रूपए तक के इलाज की सुविधा की जाती है प्रदान

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, जगदलपुर

    राज्य के नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने तथा दुर्लभ बीमारियों के इलाज में होने वाले व्यय से बचाने हेतु राज्य शासन द्वारा संजीवनी सहायता कोष का विस्तार करते हुये मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना प्रारंम्भ करने का निर्णय लिया गया है। इस योजना के अंतर्गत चिन्हित दुर्लभ बीमारियों के लिए राज्य के पात्र परिवारों को अधिकतम 20 लाख रूपए तक के इलाज की सुविधा प्रदान की जाती है। छत्तीसगढ़ ऐसा पहला राज्य है, जो इतनी बड़ी राशि अपने राज्य के नागरिकों के इलाज हेतु प्रदान कर रहा है, जिससे स्वस्थ एवं बेहतर छत्तीसगढ़ का निर्माण किया जा सके।

    मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजनांतर्गत बस्तर जिले से 5 मरीजों को सहायता मिल रही है। कार्यालय सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक महारानी अस्पताल जगदलपुर से प्राप्त जानकारी के अनुसार स्तन कैंसर से ग्रसित आरावती कश्यप और अंजली दास का सर्जरी उपरांत 8 साईकल किमोथेरेपी महारानी अस्पताल में पूर्ण करने के बाद रेडियोथेरेपी के लिए रायपुर भेजा गया है। इसी प्रकार फेफड़े के कैंसर से ग्रसित लखनसिंह नाग का सर्जरी उपरांत 6 साईकल किमोथेरेपी महारानी अस्पताल में पूर्ण करने के बाद रेडियेशन थेरेपी के लिए रायपुर भेजा गया है। हृदय रोगी सम्पत पंथ और जोगो सूरजों को उपचार के लिए रायपुर भेजा गया है।

  • मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत एक लाख से अधिक मरीजों ने उठाया स्वास्थ्य लाभ, मेडिकल यूनिट में मरीजों का पंजीयन तथा श्रम पंजीयन का कार्य भी किया जा रहा है

    योजना के अंतर्गत स्लम क्षेत्र में रहने वाले लोगों को गुणवत्तापूर्ण निःशुल्क स्वास्थ्य परामर्श, जांच, उपचार एवं दवाईयां कराई जा रही है उपलब्ध

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, जगदलपुर

    शासन द्वारा मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत झुग्गी-झोपड़ी, स्लम बस्तियों में मोबाईल मेडिकल यूनिट का कैम्प का आयोजन कर ऐसे गरीब, दिहाड़ी मजदूर और जरूरतमंद व्यक्तियों को स्वास्थ्य परीक्षण का लाभ दिया जा रहा है। जो कि प्रतिदिन कार्य कर अपनी कमाई करते हैं और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए अस्पताल नहीं जा पाते हैं। मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत उन्हीं के निवास स्थल के समीप स्वास्थ्य कैम्प आयोजन कर स्वास्थ्य जांच व ईलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

    मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत जगदलपुर नगर निगम और बस्तर नगर पंचायत क्षेत्र में मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से 1 लाख 4 हजार 726 मरीजों ने स्वास्थ्य लाभ उठाया है। वर्तमान में जगदलपुर नगर निगम क्षेत्र के लिए 4 मोबाईल मेडिकल यूनिट और नगर पंचायत बस्तर के लिए एक मोबाईल मेडिकल यूनिट के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही है।

    मोबाईल मेडिकल यूनिट द्वारा कैंप लगाकर मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण, दवाईयों का वितरण और लैब टेस्ट की सुविधा दी जा रही है, साथ ही मेडिकल यूनिट में मरीजों का पंजीयन तथा श्रम पंजीयन का कार्य भी किया जा रहा है। नवम्बर 2020 से प्रारंभ की गई इस योजना के अंतर्गत 14 जून 2022 तक मोबाईल मेडिकल यूनिट ने 1837 कैम्प किए, जिसमें 1 लाख 4 हजार 726 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। उसमें से 18 हजार 981 लोगों का लैब टेस्ट किया गया तथा 87 हजार 831 मरीजों को दवा वितरण किया गया। मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत मेडिकल यूनिट में स्वास्थ्य परीक्षण में आने मजदूरों का श्रम विभाग द्वारा श्रमिक पंजीयन किया गया, जिसमें 47 हजार 709 श्रमिकों ने पंजीयन करवाया।

    इस योजना के अंतर्गत स्लम क्षेत्र में रहने वाले लोगों को गुणवत्तापूर्ण निःशुल्क स्वास्थ्य परामर्श, जांच, उपचार एवं दवाईयां उपलब्ध कराई जा रही है। स्लम क्षेत्र में रहने वाली महिलाओं को निःशुल्क ए.एन.सी., पी.एन.सी., जांच सुविधा उपलब्ध होती है। स्लम क्षेत्र में रहने वाले लोगों में स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान गंभीर बीमारियों का पता चलने पर जिला चिकित्सालय या उच्च स्वास्थ्य केन्द्रों में रिफर किया जाता है। स्लम क्षेत्र में स्वास्थ्य शिक्षा के माध्यम से स्वास्थ्य संबंधी जानकारी प्रदान करना तथा उनके रोक-थाम के उपायों की जानकारी भी प्रदान किया जाता है। साफ सफाई, पीने योग्य पानी की उपलब्धता, रोग वाहकों पर नियंत्रण की जानकारी के साथ-साथ स्वास्थ्य परीक्षण हेतु लैब का संचालन एवं श्रम विभाग के द्वारा श्रमिक पंजीयन की सुविधा भी दी जा रही है। निगम द्वारा स्वास्थ्य स्तर में सुधार के लिए मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत चलित चिकित्सा दल का गठन कर स्लम क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है।

    नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा जिला स्तर पर गठित अर्बन पब्लिक सर्विस सोसायटी के माध्यम से संचालित इस योजना से न सिर्फ त्वरित उपचार किया जाता है, बल्कि मोबाइल मेडिकल यूनिट में उपलब्ध सुविधाओं के माध्यम से अलग-अलग प्रकार की जांच कर बीमारी का पता लगाकर उन्हें स्वस्थ बनाने की दिशा में कदम उठाया जाता है। विभाग द्वारा इस सेवा के संबंध में सतत् मॉनीटरिंग भी की जाती है। सुविधा को बेहतर बनाने के साथ स्टाफ की उपस्थिति सुनिश्चित करने फेस रीडिंग, रियल टाइम जीपीएस, सीसीटीवी कैमरा आदि की व्यवस्था भी की गई है।

  • धनवंतरी मेडिकल स्टोर से हर वर्ग के लोगों को मिल रहा लाभ, 27 लाख 53 हजार एमआरपी की दवाई की हुई बिक्री

    अब तक विक्रय की गई दवाओं में उपभोक्ताओं को 17 लाख 28 हजार की राशि की हुई बचत

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, नारायणपुर

    आम नागरिकों को बाजार में मिलने वाली महंगी दवाईयों से राहत दिलाने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा धन्वंतरी जेनरिक मेडिकल स्टोर प्रारंभ किया गया है, जहां सस्ती दर पर मिल रही गुणवत्ता पूर्ण दवाओं का सीधा लाभ आम जनता को मिल रहा है। जेनेरिक मेडिकल स्टोर में दवाईयां निजी मेडिकल स्टोर एवं बाजार में मिलने वाली दवाओं की कीमत की तुलना में 62.8 प्रतिशत से भी कम मूल्य पर मिलती है। जिससे उपभोक्ताओं के दवाई में होने वाले खर्च में कमी आ रही है।

    जिले के नगर पालिका क्षेत्र में धन्वन्तरि मेडिकल स्टोर खुलने से लोगों को सस्ते दाम पर दवाइयां उपलब्ध हो रही है। संचालित मेडिकल स्टोर में सर्दी, खांसी, बुखार, ब्लड प्रेशर जैसी आम बीमारियों के साथ-साथ गंभीर बीमारियों की जेनेरिक दवाएं, एंटीबायोटिक, सर्जिकल आइटम उपलब्ध है।  नगर पालिका नारायणपुर में संचालित मेडिकल स्टोर में योजना प्रारंभ से अब तक 4227 उपभोक्ताओं को लगभग 10 लाख 25 हजार रुपए की जेनेरिक दवाइयों का विक्रय किया गया है, जिसका वास्तविक मूल्य लगभग 27 लाख 53 हजार रूपए से अधिक है। अब तक विक्रय किए गए दवाओं में उपभोक्ताओं को 17 लाख 28 हजार की राशि की बचत हुई है।

    मेडिकल स्टोर में दवाई खरीदने आए उपभोक्ताओं का कहना है कि बाजार में 300/- रूपए कीमत की मिलने वाली दवा इस स्टोर में मात्र 126/- रुपए में मिल जाती है। इसी तरह सर्दी बुखार सहित अन्य बीमारियों की भी दवाईयां अन्य मेडिकल स्टोर की तुलना में आधे से कम दाम पर मिल रही है। उपभोक्ताओं ने सस्ती दर पर दवाइयां उपलब्ध कराकर प्रत्यक्ष लाभ आम जन को दिलाने के लिए प्रदेश सरकार एवं जिला प्रशासन को सहृदय धन्यवाद दिया है।

  • खाकी के रंग लोक-कला के संग कार्यक्रम का हुआ आयोजन : सामुदायिक पुलिसिंग के अंतर्गत एक नए कार्यक्रम का हुआ शुभारम्भ

    लोक कलाकारों के द्वारा दी गई मनमोहक प्रस्तुति

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, कोरबा

    पुलिस अधीक्षक कोरबा भोजराम पटेल के द्वारा सामुदायिक पुलिसिंग के क्षेत्र में हमेशा नए-नए प्रयोग किए जाते रहे हैं. इन्हीं प्रयोगों के तारतम्य में एक नया प्रयोग करते हुए लोक कलाकारों को सम्मानित करने हेतु खाकी के रंग लोक-कला के संग नामक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस अवसर पर स्थानीय लोक कलाकारों के द्वारा अपनी मनमोहक प्रस्तुति दी गई. कार्यक्रम में मनीष मनचला एवं ग्रुप के द्वारा छत्तीसगढ़ी लोक सांस्कृतिक कार्यक्रम, कुमारी गौरी पुष्प के द्वारा भरथरी,  गणेश बरेठ एवं उनके विद्यार्थियों द्वारा वैदिक मंत्रों पर संगत किया गया।

    इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री एल कटकवार, विशिष्ट अतिथि के रूप में कलेक्टर कोरबा श्रीमती रानू साहू, पुलिस अधीक्षक राम पटेल उपस्थित थे, सभी न्यायाधीशगण, पुलिस अधिकारी कर्मचारी, मीडिया के साथी एवं भारी संख्या में आमजन उपस्थित थे।

  • चाय के बागान से जशपुर को मिल रहा है ‘टी टूरिज्म‘ को बढ़ावा, जशपुर की नई पहचान बन गए हैं यहां के चाय बागान

    राज्य के पहले चाय प्रोसेसिंग यूनिट से हो रहा है उत्पादन

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, जशपुर

    छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले की पहचान यहां की विशिष्ट आदिवासी संस्कृति, प्राकृतिक पठारों एवं नदियों की सुंदरता तथा एतिहासिक रियासत से तो है ही, लेकिन पिछले साढ़े तीन वर्षों से जशपुर की पहचान में एक नया नाम जुड़ गया है और ये पहचान अब देशव्यापी हो गयी है। अभी तक चाय की खेती के लिए लोग आसाम या दार्जिलिंग का ही नाम लेते रहे हैं, लेकिन जशपुर में भी चाय की खेती होने लगी है जो पर्यटकों को  भी अपनी तरफ आकर्षित कर रही है।हम जानते हैं कि पर्वतीय एवं ठंडे इलाकों में ही चाय की खेती हो पाती है और छत्तीसगढ़ का जशपुर जिला भी ऐसे ही भौगोलिक संरचना पर स्थित है।

    पठारी क्षेत्र होने एवं लैटेराइट मिट्टी का प्रभाव होने की वजह से जशपुर में चाय की खेती के लिए अनुकूल वातावरण है। इसे देखते हुए जशपुर में चाय की खेती के लिए यहां चाय बागान की स्थापना की गयी है। खास बात ये है कि देश के अन्य हिस्सों में चाय की खेती के लिए कीटनाशक और रासायनिक खाद का इस्तेमाल होता है, लेकिन गोधन न्याय योजना की वजह से जशपुर के चाय बागानों में वर्मी कंपोस्ट खाद का इस्तेमाल किया जाता है जो चाय के स्वाद को बढ़ाता ही है साथ ही सेहत का भी खयाल रखता है।

    चाय प्रसंस्करण केंद्र की स्थापना

    मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने जशपुर जिले के बालाछापर में 45 लाख रूपए की लागत से चाय प्रसंस्करण केंद्र स्थापित किया है। यहां पर उत्पादन कार्य भी प्रारंभ कर दिया गया है और इस प्रसंस्करण केंद्र से सामान्य चाय एवं ग्रीन टी तैयार किया जा रहा है।  बालाछापर में वनविभाग के पर्यावरण रोपणी परिसर में चाय प्रसंस्करण यूनिट की स्थापना की गई है।  इस यूनिट में चाय के हरे पत्ते के प्रोसेसिंग  की क्षमता 300 किलोग्राम प्रतिदिन की है।

    पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है चाय बागान

    जशपुर जिला मुख्यालय से तीन किलोमीटर की दूरी पर पहाड़ी और जंगल के बीच स्थित सारूडीह चाय बागान एक पर्यटन स्थल के रूप में भी लोकप्रिय होता जा रहा है। यहां रोजाना बड़ी संख्या में लोग चाय बागान देखने पहुंचते है। 18 एकड़ का यह बागान वन विभाग के मार्गदर्शन में महिला समूह द्वारा संचालित किया जा रहा है। सारूडीह के सात ही सोगड़ा आश्रम में भी चाय की खेती के कारण जशपुर जिले को एक नई पहचान और पर्यटकों को घूमने का एक नया स्थान मिला है।

  • मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना अंतर्गत जशपुर जिले के लोगों का किया जा रहा उपचार, मोबाईल मेडिकल यूनिट के माध्यम से अब तक कुल 5603 मरीजों को किया गया लाभान्वित

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, जशपुर

    मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना अंतर्गत स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मोबाईल मेडिकल यूनिट की सुविधा प्रारंभ कर दूरस्थ अंचल के जरूरतमंद लोगों तक स्वास्थ्य परीक्षण के लिए बेहतर साधन उपलब्ध कराया गया है। मोबाईल मेडिकल यूनिट के माध्यम से लोगों का खून जांच, थायराइड, मलेरिया, टाइफाइड, ईसीजी, ब्लड प्रेशर, पल्स, ऑक्सीमीटर के साथ अन्य जांच कुशल लैब टेक्नीशियन एवं अत्याधुनिक सुविधा वाली मशीनों से की जाएगी। मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना का शिविर सभी वार्डों में रूट के अनुसार संचालित किया जा रहा है।

    नगर पालिका से प्राप्त जानकारी के अनुसार अब तक की स्थिति में 81 कैंप लगाया गया है। जिसमें कुल 5603 मरीजों को लाभान्वित किया गया है। साथ ही मरीजों को निःशुल्क दवाईयों का भी वितरण किया गया।

  • शासकीय आयुष पॉलीक्लीनिक में मरीजों का किया जा रहा नि:शुल्क आयुर्वेदिक उपचार, विगत एक वर्ष में 16 हजार से अधिक मरीजों ने उठाया उपचार का लाभ

    शासन द्वारा ढाई करोड़ रूपए की लागत से निर्मित शासकीय आयुष पॉलीक्लीनिक में आयुर्वेद, होम्योपैथी, योग एवं यूनानी पद्धति से किया जा रहा है उपचार

    रहन-सहन, खान-पान, योग, व्यायाम एवं स्वस्थ जीवन शैली को अपनाकर स्वस्थ रहने की दी जा रही जानकारी

    पंचकर्म, कटिबस्ती, जानूबस्ती, ग्रीवाबस्ती, शिरोधारा, अनुवासन बस्ती,  बालुका स्वेदन, नाड़ी स्वेदन, नेत्र दर्पण, कपिंग्स थैरेपी, नस्य जैसी विभिन्न थेरेपी से हो रहा उपचार

    सत्येन्द्र के ब्लडप्रेशर की बीमारी हुई दूर, श्री कुमार को कमर दर्द से मिली राहत, सियान-जतन क्लीनिक अंतर्गत बुजुर्गों के लिए विशेष ओपीडी सुविधा उपलब्ध

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, राजनांदगांव

    शासकीय आयुष पॉलीक्लीनिक चिखली में मरीजों का समर्पित भाव से नि:शुल्क आयुर्वेदिक उपचार किया जा रहा है। शासन द्वारा ढाई करोड़ रूपए की लागत से निर्मित शासकीय आयुष पॉलीक्लीनिक में आयुर्वेद, होम्योपैथी, योग एवं यूनानी शाखाएं हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए शासन द्वारा लगातार कार्य किए जा रहे हैं। शासकीय आयुष पॉलीक्लीनिक के ओपीडी में प्रतिदिन मरीजों का इलाज किया जा रहा है। शासकीय आयुष पॉलीक्लीनिक की लोकप्रियता अच्छे उपचार के कारण बढ़ी है। जिला आयुर्वेद अधिकारी डॉ. रमाकांत शर्मा के मार्गदर्शन में यहां प्रतिदिन प्रतिबद्ध टीम द्वारा निरंतर सेवाएं दी जा रही है।

    शासकीय आयुष पॉलीक्लीनिक की प्रभारी आयुर्वेद अधिकारी डॉ. प्रज्ञा सक्सेना ने बताया कि ओपीडी की सुविधा उपलब्ध है। इसके साथ पंचकर्म की सुविधा, कटिबस्ती, जानुबस्ती, ग्रीवाबस्ती, शिरोधारा, स्वेद पत्रपिंड, अनुवासन बस्ती, मात्रा बस्ती, विरेचन बालुका स्वेदन, नाड़ी स्वेदन, नेत्र तर्पण, कपिंग्स थैरेपी, नस्य जैसी विभिन्न थेरेपी से ईलाज किया जा रहा है एवं नि:शुल्क दवाईयां दी जा रही है। गौरतलब है कि प्राकृतिक जड़ी-बूटियों एवं आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति विभिन्न प्रकार की बीमारियों में कारगर है। आज की व्यस्त दिनचर्या से कई तरह की व्याधियां मनुष्य को बीमार बना रही है। ब्लडप्रेशर, शुगर, सर्वाइकल स्पांडिलाइटिस, सिरदर्द जैसी कई बीमारियों का अच्छा इलाज आयुर्वेद में उपलब्ध है। अपने रहन-सहन, खान-पान, योग, व्यायाम एवं स्वस्थ जीवन शैली को अपनाकर हम अपना स्वास्थ्य अच्छा रख सकते हैं।

    राजनांदगांव के कौरिनभाठा के सत्येन्द्र खरे ने बताया कि उन्हें 120 से 220 तक हाई ब्लडप्रेशर रहा है, जो ठीक नहीं हो पा रहा था। पॉलीक्लीनिक में ईलाज के बाद ब्लडप्रेशर सामान्य हुआ तथा स्वास्थ्य में सुधार हुआ। उन्होंने बताया कि यहां ईलाज कराने से उन्हें बहुत फायदा मिला और सर्वाइकल एवं घुटने के दर्द का ईलाज भी यही से करा रहे हैं। कुमार साहू ने बताया कि वे 5 वर्ष से कमर के दर्द से पीडि़त थे। यहां आने के बाद लगातार ईलाज कराने से अब राहत मिली है। उन्होंने बताया कि पहले वे झुक नहीं पाते थे, लेकिन वे अब झुक कर भी अपना कार्य कर पा रहे हैं। चिखली निवासी मंदाकनी श्वांस से संबंधित समस्या का ईलाज करा रही है और अब पहले से आराम है। ग्राम भेडि़कला के बागेश्वर के वात की समस्या यहां ईलाज से दूर हुई। बजरंगपुर नवागांव के रीता कुशवाहा को संधिवात का ईलाज कराने से फायदा मिला। मोतीपुर के ज्ञानेश्वर देवांगन ने बताया किया पेट से संबंधित समस्या थी जिसके लिए परेशान रहते थे, यहां ईलाज कराने के बाद बहुत लाभ मिला। उल्लेखनीय है कि यहां सियान-जतन क्लीनिक अंतर्गत बुजुर्गों के लिए विशेष ओपीडी का संचालन किया जा रहा है। उन्हें चिकित्सीय परामर्श के साथ ही पंचकर्म की चिकित्सा भी दी जा रही है। बच्चों के बाल्य रोग के लिए भी चिकित्सा दी जा रही है। कुपोषण एवं अन्य बीमारियों का उपचार भी किया जा रहा है। वर्ष 2020-21 में 16 हजार 464 मरीजों का ईलाज यहां किया गया है।

  • प्रदेश में बीते दो माह में 12,700 लोगों के मोतियाबिंद का सफल ऑपरेशन, जन्मजात मोतियाबिंद से पीड़ित 53 बच्चों का भी सफल ऑपरेशन

    दृष्टि में धुंधलापन या अस्पष्टता, निकट दृष्टि दोष में निरंतर बढ़ोतरी, आंखें चौंधियाना, दोहरी दृष्टि और चश्मे के नंबर में अचानक बदलाव आना मोतियाबंद के लक्षण

     मोतियाबिंद ऑपरेशन से दो बहनों की आंखों की रोशनी लौटी, दो साल से दृष्टिहीनों जैसा जीवन जीने को थीं मजबूर

     समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, रायपुर

    प्रदेश में पिछले दो महीनों में 12 हजार 700 लोगों के मोतियाबिंद का सफल ऑपरेशन कर उनकी दृष्टि लौटाई गई है। इस दौरान जन्मजात मोतियाबिंद से पीड़ित 53 बच्चों का भी सफल ऑपरेशन कर उनका जीवन रोशन किया गया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए जा रहे मोतियाबिंद ऑपरेशन अभियान के अंतर्गत कोंडागांव के सुदूर वनांचल के कुम्हारबड़गांव की दो बुजुर्ग महिलाओं का ऑपरेशन कर उनके जीवन में दोबारा उजाला बिखेरा गया है। ये दोनों बहनें मोतियाबिंद के कारण बीते दो सालों से दृष्टिहीनों जैसा जीवन जीने को मजबूर थीं।

    स्वास्थ्य विभाग में अंधत्व निवारण समिति के प्रभारी संचालक डॉ. सुभाष मिश्रा ने बताया कि अधिकतर मोतियाबिंद धीरे-धीरे विकसित होता है। शुरूआत में दृष्टि प्रभावित नहीं होती है, लेकिन समय के साथ यह देखने की क्षमता को प्रभावित करता है। इसके कारण व्यक्ति अपनी प्रतिदिन की सामान्य गतिविधियों को भी नहीं कर पाता है। मोतियाबिंद के लक्षणों में दृष्टि में धुंधलापन या अस्पष्टता, बुजुर्गों में निकट दृष्टि दोष में निरंतर बढ़ोतरी, दिन के समय आंखें चौंधियाना, दोहरी दृष्टि (डबल विजन) तथा चश्मे के नंबर में अचानक बदलाव आना प्रमुख हैं।

    डॉ. मिश्रा ने बताया कि राज्य शासन ने 2025 तक मोतियाबिंद से दृष्टिहीनता को दूर करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए हर साल करीब एक लाख से अधिक लोगों के मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया जाना है। हर वर्ष कार्निया ट्रांसप्लांट के माध्यम से करीब 200 लोगों को आंखों की रोशनी दी जाती है। इस वर्ष बीते दो महीनों अप्रैल और मई में प्रदेश में 12 हजार 700 लोगों के मोतियाबिंद का सफल ऑपरेशन किया जा चुका है। वहीं चिरायु दल द्वारा चिन्हांकित 79 जन्मजात मोतियाबिंद पीड़ित बच्चों में से 53 बच्चों का सफल ऑपरेशन किया गया है।

    कोंडागांव के सुदूर वनांचल के कुम्हारबड़गांव की दो बुजुर्ग महिलाओं की भी रोशनी मोतियाबिंद ऑपरेशन के जरिए लौटाई गई है। ये दोनों बहनें पिछले दो वर्षों से दृष्टिहीन सा जीवन जीने को मजबूर थीं। मोतियाबिंद के कारण दो सालों से वे कुछ भी देख पाने में सक्षम नहीं थीं। ऑपरेशन के बाद दोनो बहनें वापस अपना सामान्य जीवन जीने लगी हैं। शिक्षा व जानकारी के अभाव में अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में मोतियाबिंद व इससे जुड़ी जागरूकता की कमी है। इसके चलते लोग धीरे-धीरे अपनी आंखों की रोशनी खोते रहते हैं।

  • जशपुर जिले में 21 जून से 05 जुलाई तक मनाया जाएगा गहन डायरिया नियंत्रण पखवाड़ा, सीएमएचओ ने जिंक एवं ओआरएस कार्नर का शुभारंभ कर, प्रचार रथ को हरी झण्डी दिखाकर किया रवाना

    पखवाड़े में नौनिहालों को डायरिया से मुक्त करने हेतु ओआरएस और जिंक टेबलेट की जाएगी वितरित

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, जशपुर

    स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग जिला जशपुर की ओर से बच्चों को डायरिया से बचाने के लिए हर वर्ष की भाँति इस वर्ष भी एक नई पहल की है। जिसके तहत विगत 21 जून से 05 जुलाई 2022 तक गहन डायरिया नियंत्रण पखवाड़े का आयोजन किया जा रहा है। पखवाड़े का शुभारंभ करते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ श्री रंजीत टोप्पो ने जिला अस्पताल में जिंक एवं ओआरएस कार्नर का उद्घाटन किया एवं  गहन डायरिया नियंत्रण पखवाड़े के प्रचार रथ को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया।

    स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार पांच साल से कम उम्र के बच्चों की दस्त व कुपोषण से होने व मृत्यु दर में कमी लाने व आमजन को जागरूक करने के उद्देश्य से इस पखवाड़े का आयोजन किया जा रहा है। इस पखवाड़े के माध्यम से लोगों को स्वच्छता एवं पौष्टिक आहार, हाथ धोने का सही विधि के बारे में जानकारी दी जाएगी। इस अभियान की मॉनिटरिंग मैदानी स्तर पर की जाएगी। नौनिहालों को डायरिया से मुक्त करने के लिए ओआरएस का घोल और जिंक टेबलेट दी जायेगी। इसके लिए चिकित्सा विभाग द्वारा पूरी तैयारियां सुनिश्चित की गई है। जिला अस्पताल सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, उप स्वास्थ्य केंद्र में चिन्हित स्थान पर ओआरएस कॉर्नर स्थापित किया गया है। इस दौरान  आशा सहयोगी इस अभियान में 0 से 05 वर्ष तक बच्चों के घर-घर जाकर अपनी सेवाएं देंगी। साथ ही एएनएम व मितानिन द्वारा ओआरएस के पैकेट व जिंक की गोलियां वितरित की जाएगी। लोगों में जागरूकता लाने साबुन से हाथ धोने पर जोर दिया जाएगा। दस्त व निर्जलीकरण से होने वाली मृत्यु को ओआरएस व जिंक गोली के साथ ही पर्याप्त पोषण देकर रोका जा सकता है। उन्होंने बताया कि दस्त की रोकथाम के लिए साफ पानी पीना, समय-समय पर हाथों को साफ पानी और साबुन से धोना, अपने आस पास साफ सफाई रखने के साथ ही  स्तनपान, टीकाकरण व पोषण का अहम योगदान होता है। इन आदतों को भी दैनिक जीवन में शामिल किया जाना चाहिए। जन समुदाय को पखवाड़े के माध्यम से 0 से 05 साल तक के दस्त पीड़ित बच्चों तक ओआरएस के पैकेट व जिंक की गोलियां पहुंचाना सुश्चित किया जाएगा।

    05 वर्ष से कम आयु के बच्चों में दस्त और कुपोषण से होने वाली मृत्यु दर में कमी लाने और आमजन को जागरूक करने के उद्देश्य से 21 जून से डायरिया नियंत्रित पखवाड़े में ओआरएस और जिंक का वितरण जिला अस्पताल सहित सभी स्वास्थ्य केंद्रों में किया जा रहा है। जो कि 05 जुलाई 2022 तक आयोजित होगा। इस पखवाड़े के  दौरान 05 वर्ष से कम आयु वाले बच्चों को चिन्हित कर घरों में आशा सहयोगी द्वारा जिंक की गोलियां वितरित की जाएगी। स्वास्थ्य केन्द्र में आशा को पखवाड़े के लिये आवश्यक आईसी और वारिस पैकेट गोलियां पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराई गई है। जिससे वह चिन्हित बच्चों में ओआरएस और जिंक की दवाई वितरित कर सके। इस अवसर पर जिला कार्यक्रम प्रबंधक सुश्री स्मृति एक्का, जिला नोडल अधिकारी शिशु स्वास्थ्य,सिविल सर्जन सहमुख्य अस्पताल अधीक्षक तथा स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी कर्मचारी उपस्थिति थे।