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  • HEALTH : वायु प्रदूषण से हो सकता है आंखों को नुकसान, बाहर से आने के बाद आंखों को सीधे न छुएं, हाथ बार-बार धोते रहें

    HEALTH : वायु प्रदूषण से हो सकता है आंखों को नुकसान, बाहर से आने के बाद आंखों को सीधे न छुएं, हाथ बार-बार धोते रहें

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, रायपुर

    आंख हमारे शरीर का बहुत नाजुक व महत्वपूर्ण अंग है। यह शरीर के अन्य हिस्सों की तुलना में वायु प्रदूषण के प्रति अधिक संवेदनशील होता है। वायु प्रदूषण का आंखों पर दुष्प्रभाव बिना किसी लक्षण से लेकर गंभीर जलन और पुराने दर्द तक हो सकता है। कॉन्टैक्ट लेंस के उपयोग के बावजूद आंखें इन दुष्प्रभावों के प्रति संवेदनशील होती हैं। वायु प्रदूषण फेफड़ों, हृदय और हड्डियों सहित हमारे लगभग सभी अंगों को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है।

    लंबे समय तक वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने से आंखों का सामान्य स्वास्थ्य और दृष्टि क्षमता भी खराब हो रही है। यदि आंखें नियमित रूप से प्रदूषित वायु के संपर्क में रहती हैं, तो ड्राई आई सिंड्रोम, आंखों में पानी व जलन और धुंधली दृष्टि जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के खतरनाक रूप से उच्च स्तर पर पहुंचने से यह हमारी आंखों को बहुत ही गंभीर रूप से प्रभावित करता है। यह हमारी आंखों के स्वास्थ्य और इनकी रोशनी या दृष्टि के लिए गंभीर जोखिम पैदा करता है।

    वायु प्रदूषण के संपर्क से आंखें इस तरह से हो सकती हैं प्रभावित

    वायु प्रदूषण से मुख्य रूप से आंखों में लाली और जलन, आंखों से पानी बहना, आंखों में खुजली, डिस्चार्ज, आंखों में सूजन और आंखें खोलने में कठिनाई के साथ एलर्जी, आंखों में सूखेपन का रोग या ड्राई आई डिसीज जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। इन लक्षणों में से कोई भी लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।

    प्रदूषण से आंखों को बचाना जरूरी

    अंधत्व नियंत्रण कार्यक्रम के राज्य नोडल अधिकारी डॉ. सुभाष मिश्रा ने बताया कि कुछ निवारक क्रियाओं जैसे धूप का चश्मा पहनने और वायुजनित दूषित पदार्थों के साथ आंखों के संपर्क को सीमित करने से आंखों को होने वाले नुकसान से बचाने में मदद मिल सकती है। आई ड्राप आंखों को चिकनाई देने और जलन को दूर रखने में सहायक हो सकते हैं।

    डॉ. मिश्रा ने बताया कि आंखों के संक्रमण के जोखिम को कम करने ज्यादा प्रदूषण के दिनों में आंखों की सुरक्षा का विशेष खयाल रखना चाहिए। कोशिश करें कि बाहर से आने के बाद अपनी आंखों को सीधे न छुएं और बार-बार हाथ धोते रहें। किसी भी बीमारी या प्रतिकूल परिस्थिति से लड़ने के लिए फिट रहना बहुत ज़रूरी है। आंखों की अच्छी सेहत के लिए जरूरी पोषक तत्व जैसे विटामिन ‘ए’, प्रोटीन एवं ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर आहार लें। हरी पत्तेदार सब्जियां, पालक, बादाम, जामुन, गाजर और मछली आंखों के लिए काफी फायदेमंद हैं। इनका नियमित रूप से सेवन करना चाहिए।

  • संक्रामक रोगों, बैक्टीरिया एवं वायरस से लड़ने में मददगार है टीकाकरण, विश्व टीकाकरण दिवस पर लोगों को किया जाएगा जागरूक

    संक्रामक रोगों, बैक्टीरिया एवं वायरस से लड़ने में मददगार है टीकाकरण, विश्व टीकाकरण दिवस पर लोगों को किया जाएगा जागरूक

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, तखतपुरबिलासपुर

    टीकाकरण शिशु की सुरक्षा में मददगार होता है। सभी आयु वर्ग के बच्चों को विभिन्न संक्रामक रोगों और बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकरण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसके प्रति जन-जागरुकता फैलाई जा सके, इसी उद्देश्य से 10 नवंबर को टीकाकरण दिवस मनाया जाता है। इसी कड़ी में गुरूवार को स्वास्थ्य केन्द्र में लोगों को टीकाकरण के लिए जागरूक करते हुए विश्व टीकाकरण दिवस मनाया जाएगा। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में इसकी जानकारी भी विशेष दिवस पर स्वास्थ्य केन्द्र में लोगों को दी जाएगी।

    इस संबंध में खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील हंसराज ने बताया: “बच्चों के जीवन और भविष्य की सुरक्षा के लिए सबसे प्रभावी और किफायती तरीकों में से एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, टीकाकरण से कई जानलेवा रोगों जैसे डिप्थीरिया, टिटनेस, पोलियो, खसरा, निमोनिया और रोटावायरस आदि को नियंत्रित किया जा सकता है। इसके अलावा भी कई टीके हैं जो अन्य रोगों के नियंत्रण में सहायक हैं। शिशु के जन्म के फौरन बाद ही टीकाकरण का चक्र शुरू हो जाता है। इसलिए बच्चों का टीकाकरण अवश्य करवाना चाहिए। “ उन्होंने आगे बताया “ नन्हें शिशुओं में रोग प्रतिरोधक क्षमता इतनी नहीं होती है कि वो हर तरह के वायरस और बैक्टीरिया के खिलाफ लड़ सके। इसलिए शिशु के पैदा होने के बाद उसे कुछ खास तरह की दवाएं टीके के माध्यम से दी जाती हैं। बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता को विकसित करने के लिए और वायरस-बैक्टीरिया से बच्चों को बचाने के लिए टीके लगाए जाते हैं। बच्चों को सही समय पर और सभी  टीके लगाना बेहद जरूरी होता है। एक वर्ष तक बच्चों में संक्रमण की संभावना ज्यादा होती है एव 5 वर्ष की आयु पूर्ण होने तक बच्चे कई बार संक्रमण काल से गुजरते हैं। यदि बच्चा समय से पूरी वैक्सीन ले ले तो शरीर मे इतनी प्रतिरोधक क्षमता बन जाती है जिससे शिशु मृत्यु दर बहुत ही कम हो जाती हैI”

    जरूरी टीके – टीकाकरण शिशुओं को कई जानलेवा बीमारियों जैसे – खसरा, टेटनस, पोलियो, क्षय रोग(टीबी), गलघोंटू, काली खांसी तथा  हेपेटाईटिस “बी” से बचाव के लिए लगाया जाता है। शिशु के लिए पहला सबसे जरुरी टीका बीसीजी का लगाया जाता है। यह टीका खसरा से बचाव करता है। इसके बाद हेपेटाइटिस बी, ओपीवी ( ओरल पोलियो ड्राप) , पेंटा का टीका, आईपीवी (इनएक्टिवेटेड पोलियो वैक्सीन) लगाई जाती है। इसके अलावा रोटावायरस वैक्सीन, एमआर ( मिजल्स रूबेला वैक्सीन) तथा टाइफाइड का वैक्सीन लगाया जाता है। टीकों की जानकारी और टीकाकरण के बारे में पूरी जानकारी के लिए नजदीकी सरकारी अस्पताल एवं  बच्चों के डॉक्टर से संपर्क किया जा सकता है। इसके अलावा कुछ वैकल्पिक टीके भी हैं। जैसे – न्यूमोकोकल कॉन्जुगेट वैक्सीन, इन्फ्लुएंजा फ्लू का टीका , मेनिन्जोकोकल मेनिंजाइटिस, चिकनपॉक्स (वेरीसेला) , जापानी इंसेफेलाइटिस और हैजा (कॉलरा) का टीका।

    टीकाकरण कार्यक्रम – भारत में राष्ट्रीय टीकाकरण नीति को वर्ष 1975 में अपनाया गया था, जिसका शुभारंभ EPI (Expanded Program of Immunization) द्वारा प्रांरभ किया गया। जिसे 1985 में बदलकर यूनीवर्सल इम्युनाइजेशन प्रोग्राम (UIP) करके सम्पूर्ण भारत वर्ष में लागू कर दिया गया।

  • हृदय की गंभीर बीमारी से पीड़ित 5 साल की संस्कारदीप का चेन्नई के अपोलो अस्पताल में हुआ ऑपरेशन, स्वास्थ्य मंत्री टी.एस.सिंहदेव की पहल पर चिरायु योजना के अंतर्गत हुआ नि:शुल्क इलाज

    हृदय की गंभीर बीमारी से पीड़ित 5 साल की संस्कारदीप का चेन्नई के अपोलो अस्पताल में हुआ ऑपरेशन, स्वास्थ्य मंत्री टी.एस.सिंहदेव की पहल पर चिरायु योजना के अंतर्गत हुआ नि:शुल्क इलाज

    श्री सिंहदेव ने परिजनों से फोन पर बातकर बच्ची के स्वास्थ्य की ली जानकारी

    समदर्शी न्यूज ब्यूरो, रायपुर

    स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव की पहल पर हृदय की गंभीर बीमारी से पीड़ित बिलासपुर जिले के बिल्हा विकासखंड के पसीद गांव की पांच साल की संस्कारदीप का चेन्नई के अपोलो अस्पताल में सफल ऑपरेशन हुआ है। विगत 5 नवम्बर को ऑपरेशन के बाद सीआईसीयू में तीन दिनों तक ऑब्जर्वेशन में रखने के बाद डॉक्टरों ने आज उसे जनरल वार्ड में शिफ्ट कर दिया है। स्वास्थ्य मंत्री श्री सिंहदेव ने आज संस्कारदीप के पिता संस्कार दाऊ से फ़ोन पर बातकर उसके स्वास्थ्य में सुधार की जानकारी ली।

    राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत चिरायु योजना के माध्यम से संस्कारदीप को इलाज के लिए चेन्नई भेजा गया है। वह हृदय से संबंधित ट्रिस्क्युपिड अट्रेसिया (triscupid atresia) नामक बीमारी से पीड़ित थी। ऑपरेशन के लिए उसे बीते 31 अक्टूबर को चेन्नई के अपोलो अस्पताल के पीडियाट्रिक कॉर्डिएक यूनिट में भर्ती कराया गया था, जहां डॉक्टरों ने 5 नवम्बर को उसका ऑपरेशन किया। संस्कारदीप की हालत अभी स्टेबल है और तीन दिनों तक पोस्ट ऑपरेटिव सीआईसीयू (cardiac intensive care unit) में रखने के आज जनरल वार्ड में शिफ्ट किया गया है। संस्कारदीप के ऑपरेशन के बाद उसके माता-पिता बेहद खुश हैं।

    उन्होंने अपनी बेटी के निःशुल्क इलाज की पूरी व्यवस्था के लिए छत्तीसगढ़ सरकार, स्वास्थ्य विभाग, स्टेट नोडल एजेंसी, बिलासपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा बिल्हा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की चिरायु टीम के प्रति आभार व्यक्त किया है। बिल्हा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की चिरायु टीम ने संस्कारदीप की बीमारी की पड़ताल कर उसकी जांच और इलाज के लिए हायर रिफरल सेंटर भेजा था। स्वास्थ्य विभाग द्वारा उसकी गंभीर बीमारी को देखते हुए चिरायु योजना से चेन्नई में इलाज की व्यवस्था की गई है।

  • धान खरीदी व्यवस्था पर भाजपा ने उठाए सवाल, कहा- भुपेश सरकार को तो किसानों से माफी मांगो यात्रा निकालनी चाहिए – भाजपा

    धान खरीदी व्यवस्था पर भाजपा ने उठाए सवाल, कहा- भुपेश सरकार को तो किसानों से माफी मांगो यात्रा निकालनी चाहिए – भाजपा

    किसान ही इस सरकार की बिदाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने बैठे हैं तैयार – संदीप शर्मा  

    समदर्शी न्यूज ब्यूरो, रायपुर

    भुपेश सरकार को तो किसानों से माफी मांगो यात्रा निकालनी चाहिए, धान की जो रिकार्ड खरीदी की बात कही जा रही है, वास्तव में समर्थन मूल्य में पूरा भुगतान केंद्र की मोदी सरकार कर रही है, यहां तक बारदाना, सुतली, तौलाई, स्टैकिंग, ट्रांपोर्टिंग सब का पैसा केंद्र सरकार दे रही है। राज्य सरकार तो मात्र एजेंसी है, इस सरकार में किसान जितना परेशान हुए हैं, उतना कभी नही हुए, कभी बारदाना  तो कभी टोकन, कभी पंजीयन तो कभी भुगतान के लिए परेशान होते रहे हैं।

    प्रदेश प्रवक्ता भाजपा संदीप शर्मा

    ये सरकार किसानों से वसूली का चक्र चला कर रखी है, अमानक मिट्टी युक्त गोबर को खाद बताकर जबर्दस्ती प्रति एकड़ 1000/-रुपये का खाद लेने मजबूर किया गया और 700 करोड़ वसूल लिए गया। कालाबाजारियों से मिली-भगत के कारण किसानों के जेब से हजारों करोड़ रुपये निकाल लिए गए। भूपेश सरकार ड्रामेबाजी बन्द कर किसानों से माफी मांगे, आने वाले चुनाव में खामियाजा भुगतने तैयार रहे, किसान ही इस सरकार की बिदाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने तैयार बैठे हैं।

  • छत्तीसगढ़ में साकार हो रही बापू के स्वावलंबी गांवों की परिकल्पना : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

    छत्तीसगढ़ में साकार हो रही बापू के स्वावलंबी गांवों की परिकल्पना : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

    मुख्यमंत्री ने गन्ना प्रोत्साहन योजना में किसानों को 68.90 करोड़ रूपए का किया भुगतान

    गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों के खाते में 5.35 करोड़ रूपए की राशि का ऑनलाईन अंतरण

    गोबर खरीदी के एवज में गोबर विक्रेताओं को अब तक किया गया 179.28 करोड़ रूपए का भुगतान

    रबी सीजन में भी वर्मी कम्पोस्ट के उपयोग को प्रोत्साहित करें

    स्वावलंबी गौठानों ने अब तक अपने संसाधनों से 24.15 करोड़ रूपए की गोबर खरीदी की

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, रायपुर

    मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के स्वावलंबी गांवों की परिकल्पना धीरे-धीरे साकार हो रही है। गोधन न्याय योजना के तहत गांवों में बनाए गए गौठानों में से 3089 गौठान स्वावलंबी हो गए हैं। 15 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2022 तक गौठानों में क्रय किए गए गोबर के एवज में भुगतान की गई राशि में से लगभग 50 प्रतिशत राशि का भुगतान स्वावलंबी गौठानों द्वारा किया गया है। यह एक बड़ा बदलाव है। स्वावलंबी गौठानों ने अब तक अपने संसाधनों से 24.15 करोड़ रूपए की गोबर खरीदी की है।

    मुख्यमंत्री श्री बघेल आज यहां अपने निवास कार्यालय में गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों को गोबर खरीदी की राशि, महिला स्वसहायता समूहों और गौठान समितियों को लाभांश राशि तथा गन्ना उत्पादक किसानों को गन्ना प्रोत्साहन राशि के वितरण के लिए आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने खरीफ की तरह रबी सीजन में भी वर्मी कम्पोस्ट के उपयोग को बढ़ावा देने और गौठानों में गौ मूत्र की खरीदी को प्रोत्साहित करने के निर्देश अधिकारियों को दिए।

    गौरतलब है कि अक्टूबर माह के आखरी पखवाड़े में खरीदे गए गोबर के एवज में कुल 4.69 करोड़ रूपए का भुगतान आज गोबर बेचने वाले ग्रामीणों और पशुपालकों को किया गया है। इस राशि में से विभाग द्वारा 2.37 करोड़ रूपए और स्वावलंबी गौठानों द्वारा 2.32 करोड़ रूपए का भुगतान किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एक सकारात्मक बदलाव है। राज्य सरकार की भी यह मंशा है कि आने वाले समय में सभी गौठान स्वावलंबी बने। वहां की गतिविधियों का संचालन गौठान समितियां अपने संसाधनों से कर सकें।

    मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कार्यक्रम में गोबर विक्रेता पशुपालक ग्रामीणों, गौठानों से जुड़ी महिला समूहों और गौठान समितियों को 5 करोड़ 35 लाख रूपए की राशि ऑनलाइन जारी की। गौठनों में 15 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक पशुपालक ग्रामीणों, किसानों, भूमिहीनों से क्रय किए गए 2.35 लाख क्विंटल गोबर के एवज में किया गया 4.69 करोड़ रूपए भुगतान किया गया। इसी तरह गौठान समितियों को 39 लाख और महिला समूहों को 27 लाख रूपए की लाभांश राशि का भुगतान किया गया। कार्यक्रम में कृषि मंत्री श्री रविन्द्र चौबे, स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ प्रेमसाय सिंह टेकाम, छत्तीसगढ़ राज्य खनिज विकास निगम के अध्यक्ष श्री गिरीश देवांगन, मुख्यमंत्री के सलाहकार श्री प्रदीप शर्मा, कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ कमलप्रीत सिंह भी उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में कहा कि गोधन न्याय योजना के तहत आज भुगतान की गई राशि को मिलाकर गोबर विक्रेताओं को योजना के शुरू होने के बाद से अब तक 179.28 करोड़ रूपए का भुगतान किया गया है। इसी तरह अब तक गौठान समितियों एवं महिला स्व-सहायता समूहों को 164.24 करोड़ रूपए का भुगतान किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि राज्य के 83 गौठानों में 4 रूपए लीटर की दर से अब तक 76 हजार 820 लीटर गौमूत्र क्रय किया जा चुका है। गौठानों में महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा 24,348 लीटर कीट नियंत्रक ब्रम्हास्त्र और 18,722 लीटर वृद्धिवर्धक जीवामृत तैयार किया गया है, जिसमें से 20,521 लीटर ब्रम्हास्त्र और 14,055 लीटर जीवामृत की बिक्री से कुल 15 लाख रूपए की आय हुई। इस गतिविधि को और बढ़ावा देना चाहिए।

    गन्ना उत्पादक किसानों को 68.90 करोड़ रूपए का भुगतान

    मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कार्यालय में कार्यक्रम में राज्य के गन्ना उत्पादक कृषकों को गन्ना प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत 68 करोड़ 90 लाख रूपए की बोनस राशि का ऑनलाईन अंतरण किया। इस राशि में वर्ष 2020-21 के बोनस की 11.99 करोड़ रुपए की बकाया बोनस राशि और गन्ना पेराई वर्ष 2021-22 की 56.91 करोड़ रूपए की प्रोत्साहन राशि शामिल है। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में कहा कि गन्ना उत्पादक किसानों को राजीव गांधी किसान न्याय योजना के अंतर्गत लगातार प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिससे उन्हंे खेती की लागत में भी राहत मिल रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राजीव गांधी किसान न्याय योजना में गन्ना पेराई वर्ष 2021-22 में गन्ना उत्पादक कृषकों को प्रति एकड़ के मान से 10 हजार रूपए एवं शेष राशि गन्ना प्रोत्साहन योजना अंतर्गत दिये जाने का निर्णय लिया गया था। वर्ष 2020-21 में राशि 84.25 प्रति क्विटल की दर से 28.589  कृषकों को 59.14 करोड़ रुपए का भुगतान किया जाना था,  जिसमें से 47 करोड़ 12 लाख का भुगतान किया जा चुका है। शेष राशि 11.99  करोड़ का भुगतान भारत सरकार द्वारा घोषित उचित एवं लाभकारी मूल्य के अतिरिक्त छत्तीसगढ़ शासन द्वारा किया जा रहा है। इसी तरह गन्ना पेराई वर्ष 2021-22 में 79 रुपए 50 पैसे प्रति क्विटल की दर से कुल 31, 051 कृषकों को 76.24  करोड़ रुपए का भुगतान गन्ना प्रोत्साहन राशि के रूप में किया जाना है,  परंतु राजीव गांधी किसान न्याय योजना के अंतर्गत प्रदाय की गई आदान सहायता राशि का समायोजन करने के साथ ही अंतरिम रूप से गन्ना उत्पादन प्रोत्साहन राशि के रूप में 56.91 करोड़ रूपए का भुगतान किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य शासन द्वारा वर्ष 2019-20 में 355 रुपये प्रति क्विटल की दर पर गन्ना क्रय किये जाने का निर्णय लिया गया था, जिसके फलस्वरूप वर्ष 2019-20 में गन्ना कृषकों को 93 रुपए 75 पैसे प्रति क्विंटल की दर से 34,637 कृषकों को 73 करोड़ 56 लाख रूपए का भुगतान प्रोत्साहन राशि के तौर पर किया गया था। मुख्यमंत्री ने गन्ना उत्पादक किसानों और गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों को कार्तिक पूर्णिमा और गुरूनानक जयंती की बधाई और शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री ने पण्डरिया, केरता और बालोद के गन्ना उत्पादक किसानों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चर्चा की और उन्हें बोनस वितरण के लिए बधाई दी। किसानों ने कहा कि एथेलॉन प्लांट शुरू होने से गन्ना उत्पादक किसानों को फायदा होगा।

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के सचिव अंकित आनंद, कृषि विभाग के विशेष सचिव डॉ. अय्याज एफ. तम्बोली, मिशन संचालक राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन अवनीश शरण, विशेष सचिव सहकारिता हिमशिखर गुप्ता, संचालक पशुधन श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी, कृषि विभाग के उप सचिव सुश्री तूलिका प्रजापति भी उपस्थित थीं। विभिन्न जिलों से अनेक जनप्रतिनिधि और किसान भाई भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कार्यक्रम से जुड़े थे।

  • धान खरीदी : जिले में अब तक 683 क्विंटल 60 किलो धान की हुई खरीदी

    धान खरीदी : जिले में अब तक 683 क्विंटल 60 किलो धान की हुई खरीदी

    नौ नवंबर के लिए 33 टोकन जारी, एक हजार 93 क्विंटल धान की होगी खरीदी

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, कोरबा

    जिले में 1 नवंबर से शुरू हुए धान खरीदी महाअभियान के तहत जिले के किसानों से समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी जारी है। जिले में अब तक 683 क्विंटल 60 किलो धान की खरीदी हो चुकी है। खरीदी केंद्रों में किसानों की सुविधा के लिए सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई है। किसानों की सहूलियत के लिए समिति और मोबाइल एप्प टोकन तुम्हर हाथ द्वारा टोकन जारी किया जा रहा है। 9 नवंबर के लिए 33 टोकन जारी किए गए हैं। इनमें 21 टोकन समिति द्वारा और 12 टोकन मोबाइल एप के द्वारा जारी किया गया है। जारी टोकन के माध्यम से एक हजार 93 क्विंटल से अधिक धान की खरीदी की जाएगी। सहकारी बैंक के नोडल अधिकारी श्री एसके जोशी ने बताया की अभी तक उपार्जन केंद्र कनकी  में 24 क्विंटल 80 किलो, केरवाद्वारी में 220 क्विंटल, चैतमा में 72 क्विंटल 80 किलो, छुरीकला में 120 क्विंटल, निरधी में 50 क्विंटल,  पसान में 8 क्विंटल 80 किलो,  पोड़ी में 68 क्विंटल, बिंझरा में 68 क्विंटल 80 किलो एवं खरीदी केंद्र लाफा में 50 क्विंटल 40 किलो धान की खरीदी हो चुकी है।

    33 किसानों का एक हजार 93 क्विंटल से अधिक धान खरीदने के लिए 11 उपार्जन केन्द्रों से जारी हुए टोकन – बुधवार 09 नवंबर को 33 किसानों को धान बेचने के लिए 11 उपार्जन केन्द्रों से टोकन जारी कर दिए गए हैं।  इन किसानों से एक हजार 93 क्विंटल से अधिक धान समर्थन मूल्य पर खरीदा जाएगा। बुधवार  को धान खरीदी केन्द्र छुरीकला में 04, बिंझरा में 6,  भिलाई बाजार में एक,  सुमेधा में एक, कोरबी में एक,  निरधि में दो,  पाली में 4,  लाफा में एक,  केरवाद्वारी में 7, नुनेरा में चार और नोनबिर्रा में दो किसान समर्थन मूल्य पर धान बेचेंगे।

  • HEALTH : कोविड से रिकवरी के बाद टीबी की जांच अवश्य कराएं, कमजोर इम्युनिटी की वजह से संक्रमित होने की ज्यादा संभावना

    HEALTH : कोविड से रिकवरी के बाद टीबी की जांच अवश्य कराएं, कमजोर इम्युनिटी की वजह से संक्रमित होने की ज्यादा संभावना

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, रायपुर

    कोरोना संक्रमण के मरीज ठीक होने के बाद अन्य बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। कई रोगियों में कोरोना से ठीक होने के बाद टीबी के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। कोविड के दूरगामी परिणामों को ध्यान में रखते हुए विशेषज्ञों का कहना है कि ठीक होने के बाद भी रोगी को बलगम की जांच अवश्य करानी चाहिए। टीबी और कोविड दोनों संक्रामक रोग हैं, जो मुख्य रूप से फेफड़ों को हानि पहुंचाते हैं। दोनों बीमारियों में खांसी, बुखार और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण एक जैसे होते हैं। हालांकि, टीबी में बीमारी की अवधि लंबी होती है और रोग की शुरुआत धीमी होती है।

    राज्य क्षय रोग अधिकारी (टी.बी. उन्मूलन कार्यक्रम) डॉ. धर्मेंद्र गहवई ने बताया कि कोरोना वायरस और क्षय रोग (टीबी) के संक्रमण का तरीका और लक्षण लगभग मिलते-जुलते हैं। ऐसे में संक्रमण से बचाव के लिए सावधानी बहुत जरूरी है। यह बीमारी हवा में अत्यधिक फैलती है। कोविड से रिकवर होने के बाद भी अगर लगातार खांसी की समस्या बनी हुई है, तो टीबी की जांच अवश्य करानी चाहिए। डॉ. गहवई ने बताया कि कोविड-19 के बाद टीबी भी हो सकती है क्योंकि संक्रमण फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है जिसके कारण टीबी होने की संभावना बढ़ जाती है।

    डॉ. गहवई ने बताया कि कोविड का टीका टीबी से पीड़ित रोगियों को भी लगवाना अनिवार्य है। उन टीबी रोगियों को यह टीका नहीं लगवाना चाहिए, जिन्हें तेज बुखार है या फिर कोविड के लक्षण आ रहे हैं। ऐसे लोग लक्षण के ठीक होने पर कोविड का टीका लगवाएं। टीकाकरण के बाद भी कोविड से बचाव संबंधी प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करना जरूरी है। टीबी रोगियों को टीके की दोनों डोज के साथ प्रिकाशन डोज भी लगवानी है।

    टीबी की जांच व उपचार सरकारी अस्पतालों में निःशुल्क उपलब्ध है। टीबी के लक्षण जैसे दो हफ़्तों से ज्यादा खांसी रहना, शाम के समय बुखार आना, अचानक से भूख कम लगना व वजन का घटना, लंबे समय तक बुखार का बने रहना इत्यादि दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी शासकीय स्वास्थ्य केन्द्र में जाकर अपनी जांच व उपचार अवश्य कराएं।

  • कलेक्टर ने मरीज से मोबाइल विडियो काल के माध्यम से बात करके ‘मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लिीनिक योजना’ की ली जानकारी !

    कलेक्टर ने मरीज से मोबाइल विडियो काल के माध्यम से बात करके ‘मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लिीनिक योजना’ की ली जानकारी !

    महेन्द्र जायसवाल प्रत्येक सप्ताह हाट-बाजार क्लीनिक में अपना ईलाज करवाते हैं और निःशुल्क दवाई लेकर जाते हैं

    मुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हुए कहा कि दूरस्थ अंचल के लोगों के लिए यह योजना बहुत ही फायदेमंद है

    समदर्शी न्यूज ब्यूरो, जशपुरनगर

    कलेक्टर डॉ. रवि मित्तल ने आज अपने कलेक्टोरेट कक्ष में मोबाइल विडियो काल के माध्यम से फरसाबहार विकास खंड के लवाकेरा में स्वास्थ्य विभाग के द्वारा लगाए मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लिनिक योजना की जानकारी ली। उन्होंने तपकरा निवासी मरीज महेन्द्र जायसवाल से हाट बाजार क्लिनिक के माध्यम से मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी ली। महेन्द्र जयसवाल ने बताया कि प्रत्येक सप्ताह लवाकेरा हाट बाजार क्लिनिक में समान खरीदने आते हैं और अपना ईलाज करवाते हैं साथ ही निःशुल्क दवाइयां भी लेकर जाते हैं।

    उन्होंने बताया कि उन्हें हायपरटेंशन, कमजोरी और शुगर की समस्या रहती है। मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लिनिक योजना की सराहना करते हुए कहा कि प्रत्येक सप्ताह हाट बाजार क्लिनिक में इलाज करवाने के उपरांत उनका हाइपरटेंशन, बीपी, शुगर कंट्रोल में है। दवाईयां का नियमित सेवन कर रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हुए कहा कि दूरस्थ अंचल क्षेत्र के लोगों के लिए यह योजना बहुत ही फायदेमंद है और सभी लोगों को इसका लाभ उठाना चाहिए।

  • सेहत के लिए फायदेमंद होता है फोर्टिफाइड चावल, कुपोशण और एनिमिया को दूर करने मे है बेहद कारगर

    सेहत के लिए फायदेमंद होता है फोर्टिफाइड चावल, कुपोशण और एनिमिया को दूर करने मे है बेहद कारगर

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, नारायणपुर

    वर्तमान में फोर्टिफाइड चावल के स्वास्थ्यवर्धक गुणों की महत्ता सर्व विदित है। यहीं कारण है कि राज्य शासन द्वारा सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत फोर्टिफाइड चावल वितरण को पायलट योजना के तहत् रखा गया है। और प्रदेश के सभी शासकीय उचित मूल्य दुकानों मे यह सहज उपलब्ध है।

    अगर फोर्टिफाइड चावल के स्वास्थ्य वर्धक गुणों की बात की जाए तो यह देखने में सामान्य से अधिक चिकना होने के कारण अरवां चावल से अलग दिखता है, लेकिन यह बेहतर गुणवत्ता वाले चांवल की किस्म हैं। इसमंे पौश्टिक तत्वों जैसे आयरन, फोलिक एसिड, विटामिन बी-12 प्रचूर मात्रा में पाई जाती है। आयरन खून की कमी को रोकने में सहायक है। वहीं फोलिक एसिड गर्भवती महिलाओं में खून निमार्ण, भु्रण विकास एवं नर्वस सिस्टम में लाभ दायक सिद्ध है। जबकि विटामिन बी -12 शारीरिक क्षमता एवं बुद्धि विकास में वृद्धि करता है। इस प्रकार यह पूरी तरह से कुपोशण एवं एनिमिया को दूर करने में सहायक सिद्ध हो रहा है। यही कारण है कि राज्य शासन द्वारा शालाओं एवं आंगनबाड़ी केन्द्रों में मध्यान्ह भोजन तथा पूरक पोशण आहार योजनाओं के तहत् सभी जिलों में फोर्टिफाइड चावल देने की व्यवस्था की गई है। और इसका व्यापक प्रचार प्रसार किया जा रहा है।

  • जशपुर जिला के बगीचा विकासखंड अंतर्गत पत्ताकेला गांव में विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा परिवारों के मलेरिया जांच हेतु लगाया गया कैम्प

    जशपुर जिला के बगीचा विकासखंड अंतर्गत पत्ताकेला गांव में विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा परिवारों के मलेरिया जांच हेतु लगाया गया कैम्प

    81 लोगों का हुआ जांच, एक भी मरीज मलेरिया से संक्रमित नहीं मिला

    स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में सर्वे का कार्य के साथ कर रही निगरानी भी

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, जशपुर

    मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी जशपुर से प्राप्त जानकारी के अनुसार बगीचा विकास खंड के पत्ताकेला गांव के अन्तर्गत बांसटोंगरा गांव में विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा परिवारों के लिए मलेरिया जांच कैम्प लगाया गया स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा 81 लोगों का मलेरिया जांच कैम्प में किया गया और एक भी मलेरिया संक्रमित मरीज नहीं पाए गए इसके साथ ही आज भी स्वास्थ्य विभाग का अमला गांव में सर्वे का कार्य कर रही है स्वास्थ्य विभाग गांव में निगरानी बनाकर रखा है।