छत्तीसगढ़ विधानसभा में लोकतंत्र को मजबूत करने की ऐतिहासिक पहल : विधायकों के निजी सचिवों और सहायकों को मिला उच्च स्तरीय प्रशिक्षण, डिजिटल युग में जनप्रतिनिधियों के सबसे करीबी सहयोगियों को मिला नया दृष्टिकोण.

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा, षष्ठ्म विधान सभा गठन के बाद सबसे पहले हमने मंत्रियों और विधायकों को IIM, रायपुर में प्रशिक्षण दिया और अब उनके सबसे करीबी सहयोगियों निज सचिवों (PS) और निज सहायकों (PA) के लिए यह विशेष विधानसभा में प्रशिक्षण आयोजित किया गया है। यह इसलिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि तीन करोड़ की आबादी वाले छत्तीसगढ़ में करीब सौ लोग ही ऐसे हैं, जो सीधे तौर पर विधायकों और मंत्रियों के साथ कार्यरत हैं। यह आप सभी PA/PS की जिम्मेदारी होती है कि अपने जनप्रतिनिधि को मजबूत करें, उनका सहयोग करें जिससे की शासन की योजनाओं को जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंच पाए।

विधानसभा अध्यक्ष ने जोर देकर कहा कि, निज सचिव, निज सहायक ही जनप्रतिनिधि की सफलता के सशक्त स्तंभ हैं। वे न केवल क्षेत्रीय जनता के संपर्क में रहते हैं, बल्कि विधायक या मंत्री की सार्वजनिक छवि और प्रदर्शन को भी निखारने का काम करते हैं। उनकी सजगता और दक्षता सीधे तौर पर शासन की प्रभावशीलता को प्रभावित करती है।

इसके साथ ही उन्होंने आगे कहा कि, निज सचिव, निज सहायक को मंच के पीछे रहकर सारी भूमिका निभानी पड़ती है। आपका परफॉर्मेंस अच्छा होगा तो मंत्री विधायक सफल होंगे। मैंने कई मंत्रियों, विधायकों को कई बार जीतते देखा है। PA, PS की छवि बेहतर रही इसलिए भी वे जीते।

विधानसभा अध्यक्ष ने विधायकों की भूमिका पर भी टिप्पणी करते हुए कहा “हर विधायक को अपने क्षेत्र की विस्तृत जानकारी होनी चाहिए। उन्हें सक्रिय रहकर विकास कार्यों की प्राथमिकताएं तय करनी चाहिए। चाहे वह छोटे-छोटे कार्य हों या बड़े नीतिगत निर्णय, उनकी निगरानी और दिशा का निर्धारण विधायक स्वयं करें तभी जन विश्वास मजबूत होगा।

इसके साथ ही नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में अपने संबोधन में कहा कि हर व्यक्ति को जीवन भर कुछ न कुछ सीखते रहना चाहिए। उन्होंने इस प्रशिक्षण की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए कहा, “अगर किसी विधायक या मंत्री को बर्बाद करना है तो उनका PA या PS कर सकता है, और अगर उन्हें सफल बनाना है तो भी वही कर सकता है।”

डॉ. महंत ने बताया कि वर्तमान विधानसभा में 51 नए विधायक निर्वाचित होकर आए हैं। उन्होंने कहा कि केवल कागजों पर दस्तखत करवाना या चिट्ठी लिखवाना ही एक निज सहायक की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि उन्हें अपने जनप्रतिनिधि के सच्चे सहयोगी के रूप में कार्य करना चाहिए। विधायक अथवा मंत्री की अच्छाइयों और कमजोरियों से उन्हें अवगत कराना और जनसेवा में उनकी भूमिका को मजबूती देना आवश्यक है।

पूर्ववर्ती सरकार के समय इस प्रकार के प्रशिक्षण शिविर आयोजित नहीं किए गए, इस पर प्रतिक्रिया देते हुए नेता प्रतिपक्ष ने स्पष्ट कहा, “यदि हमारे PA और PS को अंधेरे में रखा गया, तो हमसे कई गलत निर्णय भी हो सकते हैं। किसी भी नेता की हार या जीत में उनका सहयोग निर्णायक होता है।”

कार्यक्रम में संसदीय कार्य मंत्री श्री केदार कश्यप जी ने भी संबोधित किया और कहा कि सदन के संचालन में निज सचिवों और सहायकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। ये लोग ही जनप्रतिनिधियों के सहयोगी बनकर कार्य करते हैं। उनकी सजगता और दक्षता ही जनसेवा की गुणवत्ता तय करती है।

छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह जी के विशेष सचिव अरुण बिसेन ने “निज सचिव/निज सहायक की विधान सभा एवं शासन में समन्वय हेतु भूमिका, सोशल मीडिया एवं टेक्नोलॉजी का बेहतर उपयोग” विषय पर निज सचिव/निज सहायक को संबोधित करते हुए अपने 23 वर्षों के प्रशासनिक अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि किस प्रकार मीडिया, विशेष रूप से सोशल मीडिया का सकारात्मक उपयोग कर जनप्रतिनिधि की छवि को बेहतर बनाया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि कैसे एक निज सहायक जनप्रतिनिधि को जनता से जोड़ने में एक सशक्त सेतु की भूमिका निभा सकता है।

अरुण बिसेन ने कहा कि जरूरतमंदों को स्वेच्छानुदान की राशि कैसे सूचीबद्ध और पारदर्शी तरीके से प्रदान की जा सकती है, यह समझना आवश्यक है।

उन्होंने कहा, जब आपके पास कोई भी व्यक्ति चिकित्सा संबंधी कोई गंभीर सहायता के लिए आता है तब आपको व्यक्तिगत रूप से समर्पित होकर कार्य करना पड़ता है उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए 2011 की एक घटना का उल्लेख किया, जब एक गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति का लिवर ट्रांसप्लांट दो राज्यों के बीच समन्वय स्थापित कर सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि किसी भी क्षेत्र से यदि कोई व्यक्ति स्वास्थ्य या अन्य गंभीर समस्या लेकर आता है, तो निज सचिव को उसमें व्यक्तिगत रूप से सम्मिलित होना चाहिए।

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने मंत्रियों और विधायकों से व्यवहार पर भी विस्तार से विचार रखे। उन्होंने कहा कि सदन में व्यवहार कुशलता और गरिमा ही विधायक या मंत्री की सकारात्मक छवि निर्माण में सहायक होती है। उन्होंने कहा कि आप सभी PA/PS अपने जनप्रतिनिधियों के सबसे विश्वसनीय सहयोगियों में से होते हैं, अतः हर कदम पर उनकी पूर्ण सहायता करें।

डिजिटल युग की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उन्होंने वर्चुअल डॉक्यूमेंट, डिजिटल फाइल्स, क्लाउड स्टोरेज और गूगल ड्राइव जैसे टूल्स के प्रभावी उपयोग की सलाह दी। उन्होंने विशेष रूप से यह बताया कि निज सचिवों को स्वयं को लगातार अपडेट करते रहना चाहिए। उन्होंने अपने ही उदाहरण से प्रेरित करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री सचिवालय में कार्यरत होते हुए IIM रायपुर से MBA की डिग्री अर्जित की है, और यह सिद्ध करता है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती।

Related posts