माननीय श्री न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा, मुख्य न्यायाधिपति, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 13 सितंबर, 2025 को आयोजित होने वाली नेशनल लोक अदालत की तैयारियों की समीक्षा हेतु राज्य के न्यायिक अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक आयोजित की गई
बिलासपुर, 28 अगस्त, 2025 : माननीय श्री न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा, मुख्य न्यायाधिपति, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मुख्य संरक्षक महोदय के द्वारा आगामी नेशनल लोक अदालत जो कि दिनांक 13 सितंबर, 2025 को आयोजित की जानी है, की तैयारियों की समीक्षा हेतु राज्य के सभी प्रधान जिला न्यायाधीश / अध्यक्षगण, जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के सचिवगण, परिवार न्यायालयों के न्यायाधीशगण, स्थायी लोक अदालतों के अध्यक्ष, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी एवं श्रम न्यायालयों के न्यायाधीशगण के साथ वर्चुअल बैठक आयोजित की गई।
इस बैठक की सह-अध्यक्षता माननीय श्री न्यायमूर्ति संजय के. अग्रवाल, कार्यपालक अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण एवं माननीय श्री न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीम साहू, अध्यक्ष, उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति, बिलासपुर द्वारा की गई।
बैठक के दौरान माननीय मुख्य न्यायाधिपति महोदय ने सभी न्यायिक अधिकारियों को यह निदेशित किया गया कि वे विशेष प्रयास कर अधिक से अधिक पुराने लंबित दीवानी और राजीनामा योग्य आपराधिक मामलों की पहचान कर उनका निपटारा सुनिश्चित करें। उन्होंने विशेष रूप से उन मामलों पर ध्यान केंद्रित करने को कहा जिनमें महिलाएं, वरिष्ठ नागरिक, परक्राम्य लिखत अधिनियम के अंतर्गत मामले तथा मोटर दुर्घटना दावा संबंधित वाद शामिल हों।
माननीय मुख्य न्यायाधिपति महोदय ने यह भी कहा कि सभी न्यायिक अधिकारी पक्षकारों को उनके लंबित और प्री-लिटिगेशन दोनों प्रकार के विवादों को इस नेशनल लोक अदालत के माध्यम से सुलझाने हेतु प्रोत्साहित करें।
यह उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली द्वारा वर्ष 2025 के लिए निर्धारित कैलेंडर के अनुसार यह नेशनल लोक अदालत दिनांक 13 सितंबर, 2025 को पूरे राज्य के सभी न्यायालयों, उच्च न्यायालय, जिला न्यायालय, तहसील न्यायालय, पारिवारिक न्यायालय, उपभोक्ता फोरम, अधिकरणों सहित सभी राजस्व न्यायालयों में आयोजित की जाएगी, जिसमें दीवानी एवं राजीनामा योग्य आपराधिक मामलों सहित अन्य विवादों का समाधान किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, मोहल्ला लोक अदालत के माध्यम से जन उपयोगिता सेवाओं से संबंधित विवादों का भी निराकरण किया जाएगा।
