PSC में गोपनीयता भंग, वही बने पूर्णकालिक अध्यक्ष – कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर का बड़ा आरोप

क्या यूपीएससी की परीक्षा ऐसी होती है, पेपर कौन जांचेगा, उसका नाम खबर में छपता है

भाजपा सरकार युवाओं को यूपीएससी की तर्ज पर पीएससी की परीक्षा दिलाने के नाम से धोखा दे रही

रायपुर/30 अगस्त 2025। पीएससी परीक्षा की पेपर जांचने वाले का नाम सार्वजनिक होने के बाद कार्यवाही नहीं होने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि पीएससी जैसी संस्था के खिलाफ भाजपा ने पहले दुर्भावना पूर्वक राजनीति किया पीएससी संस्था को बदनाम किया और यूपीएससी की तर्ज पर पीएससी की परीक्षा आयोजित करने का युवाओं से वादा किया था आज स्थिति यह है कि पीएससी की परीक्षा के पेपर कहां जांची जा रही, यह अखबारों में छप रहा? कौन जांच रहा है, उसका नाम अखबारों में छप जाता है। दुर्भाग्य की बात है पेपर जांच में गड़बड़ी करने वाले जिम्मेदार पीएससी के कार्यकारी अध्यक्ष पर कार्यवाही करने के बजाये भाजपा की सरकार रीता शांडिल को पीएससी की पूर्णकालिक अध्यक्ष नियुक्त कर देती है और परीक्षा पेपर जांच में हुई गड़बड़ियों पर कार्यवाही नहीं करती है क्या यही यूपीएससी के तर्ज पर पीएससी की परीक्षा है?

प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि पीएससी की परीक्षा बिलासपुर के पीजीबीटी कॉलेज के डेपुटेशन में नौकरी करने वाले लोग जांच रहे हैं जांच करने वाले शिक्षक विद्या भूषण शर्मा ,सलीम जावेद एवं वहाँ के प्रिंसिपल का नाम का उल्लेख है। इस खबर के सार्वजनिक होने के बाद अभी तक पीएससी की ओर से ना तो उसका खंडन किया गया है न स्पष्टीकरण दिया गया है न किसी प्रकार से कार्यवाही किया गया है इसे समझ में आता है की दाल में कुछ काला नहीं बल्कि पूरी दाल ही काली है।

प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि कोई भी परीक्षा हो उसके परीक्षा प्रश्न पत्र सेट करने से लेकर उत्तर पुस्तिका जांचने का काम अति गोपनीय होता है। लेकिन पीएससी परीक्षा का प्रश्न पत्र कौन लोग जांच रहे हैं यह सार्वजनिक हो गया है ऐसे में परीक्षा में गोपनीयता बचती ही नहीं है परीक्षा की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर बड़ा सवाल है परीक्षा में ईमानदारी से बिना गड़बड़ी के चयन होना चाहिए। पांचवी आठवीं दसवीं बोर्ड के परीक्षा में भी प्रश्न पत्र सेट करने वाले जचने वाले शिक्षकों के नाम को अपनी रहते हैं यहां तो पीएससी के माध्यम से एसडीएम डीएसपी नायब तहसीलदार महिला बाल विकास अधिकारी एवं अनुच्छेद सोमवार के पदों पर नियुक्ति होना है लेकिन उसमें गोपनीयता बची ही नहीं क्या पीएससी ने सब कुछ पहले से तय कर लिया है की किन-किन उम्मीदवारों का चयन करना है कितना का लेनदेन किया गया है। जब बाजारों में परीक्षकों के नाम सामने आ रहे तो इसकी क्या गारंटी है की परीक्षा की कॉपी निष्पक्षता से जानी जाएगी पीएससी परीक्षा की सीबीआई जांच होनी चाहिए।

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