· उपाध्यक्ष का आरोप—द्वेषपूर्ण कार्रवाई के तहत छीना गया कार्यालय
· राजस्व शाखा को कक्ष आवंटन पर बढ़ा विवाद, तहसीलदार को करना पड़ा हस्तक्षेप
· समाधान तो निकला, पर प्रशासन बनाम जनप्रतिनिधि की खींचतान आई खुलकर सामने
कुनकुरी : शुक्रवार की सुबह नगर पंचायत कुनकुरी में उस समय हलचल मच गई जब वार्ड क्रमांक 1 के पार्षद एवं उपाध्यक्ष दीपक केरकेट्टा रोज़ की तरह कार्यालय पहुंचे और पाया कि उनका कक्ष रातों-रात राजस्व शाखा में परिवर्तित कर दिया गया है। जिस कमरे में वे जनता की समस्याएं सुनते थे, वहां अब फाइलों का अंबार और राजस्व विभाग का बोर्ड दिखाई दिया। बिना पूर्व सूचना हुए इस बदलाव ने माहौल को तुरंत गरमा दिया।
जवाब की मांग, असंतोष की शुरुआत
उपाध्यक्ष ने तत्काल मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) राजेन्द्र कुमार पात्रे से इस निर्णय पर स्पष्टीकरण मांगा। सीएमओ का कहना था कि राजस्व शाखा के पास अलग कक्ष नहीं है और दस्तावेज अव्यवस्थित रूप से हॉल में रखे जा रहे थे, इसलिए प्रशासनिक आवश्यकता के तहत यह निर्णय लिया गया। हालांकि उपाध्यक्ष इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने इसे मनमाना कदम बताया।
ताला और धरना — विरोध का अनोखा तरीका
स्थिति तब और नाटकीय हो गई जब उपाध्यक्ष ने उस कक्ष पर ताला जड़ दिया और नगर पंचायत के मुख्य द्वार के समीप जमीन पर बैठकर विरोध दर्ज कराया। उन्होंने वहीं बैठकर लोगों के आवेदन भी सुने, जिससे दृश्य प्रतीकात्मक बन गया — एक ओर कार्यालय के भीतर प्रशासनिक व्यवस्था, दूसरी ओर बाहर धरने पर बैठे निर्वाचित जनप्रतिनिधि।
राजनीतिक हलचल और तीखी नोकझोंक
घटना की सूचना मिलते ही कांग्रेस पार्टी के स्थानीय पदाधिकारी और पार्षद नगर पंचायत कार्यालय पहुंचे। सीएमओ के कक्ष में तीखी बहस और आरोप-प्रत्यारोप हुए। मामला बढ़ता देख उच्चाधिकारियों को जानकारी दी गई और तहसीलदार को मौके पर हस्तक्षेप के लिए बुलाया गया। लगभग चार घंटे तक चला यह घटनाक्रम नगर पंचायत परिसर में चर्चा का विषय बना रहा।
प्रशासनिक हस्तक्षेप और समाधान
अंततः उच्चाधिकारियों के निर्देश पर उपाध्यक्ष को उनका कक्ष पुनः आवंटित कर दिया गया। राजस्व शाखा को पूर्व की भांति बैठक कक्ष से संचालित करने का निर्णय लिया गया। इस समझौते के साथ विवाद शांत हुआ, लेकिन प्रशासनिक निर्णय प्रक्रिया को लेकर सवाल बने रहे।
आरोप बनाम स्पष्टीकरण
उपाध्यक्ष दीपक केरकेट्टा ने इस कार्रवाई को द्वेषपूर्ण बताते हुए कहा कि हाल ही में भूमि पूजन के शिलालेख में नाम शामिल न किए जाने और नगर पंचायत की कार्यशैली पर सवाल उठाने के कारण यह कदम उठाया गया। वहीं सीएमओ राजेन्द्र कुमार पात्रे ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय केवल कार्यालयीन आवश्यकता और राजस्व शाखा के दस्तावेजों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया था।
कानूनी दृष्टिकोण
नगर निकायों का संचालन छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम, 1961 के अंतर्गत होता है। अधिनियम में उपाध्यक्ष के लिए पृथक कक्ष का स्पष्ट अनिवार्य प्रावधान नहीं है, परंतु निर्वाचित जनप्रतिनिधि के कार्य में बाधा उत्पन्न होने की स्थिति प्रशासनिक समीक्षा का विषय बन सकती है। ऐसे मामलों में पारदर्शिता, पूर्व सूचना और संवाद को आवश्यक माना जाता है।
