खेलकूद में बढ़ती चमक को पाने डूबे रहे सितारे
अफसोस: खिलाड़ियों के द्वारा प्रतिबंधित दवा सेवन मामले में भारत सबसे आगे
विशेष लेख – जसवंत क्लॉडियस, वरिष्ठ खेल पत्रकार, रायपुर
रायपुर : इन दिनों खेल व खिलाड़ियों से जुड़ी एक खबर आई है कि एथलेटिक्स इंटीग्रिटी यूनिट संस्था जिसे विश्व एथलेटिक्स ने स्थापित किया है। यह संस्था किसी भी मान्य खेल के प्रतिस्पर्धी द्वारा प्रतिबंधित दवा के सेवन या अन्य गलत उपाय द्वारा अप्रत्याशित परिणाम पाने के संबंध में जानकारी को उजागार करता है। भारत के लिए दुर्भाग्य की बात है कि इस सूची में अब तक हमारे देश के विभिन्न खेलों की चैम्पियनशिप में शामिल 148 खिलाड़ियों और खेल सहयोगियों के नाम शामिल है।
आश्चर्यजनक रूप से भारतीय खिलाड़ियों ने 2025 में प्रतिबंधित दवा का सेवन करने वाले खिलाड़ियों या सहयोगी स्टाफ का नाम सामने आया है। इसके पूर्व केन्या के एथलीट इस सूची में अव्वल थे। एथलेटिक्स इंटीग्रिटी यूनिट को विश्व एथलीट द्वारा 2017 में स्थापित किया गया था जिससे खेलों की दुनिया की अखंडता को दुरुस्त रखा जा सके। यह यूनिट डोपिंग परिणामों में हेरफेर, उम्र में गड़बड़ी, खेल में भ्रष्टाचार और सट्टेबाजी जैसी स्पर्धा से निपटने के लिए एक स्वतंत्र एजेंसी के रूप में कार्य करता है।
एथलेटिक्स इंटीग्रिटी यूनिट की स्थापना का उद्देश एथलीटों पर जनता का विश्वास और मान्यता प्राप्त स्पर्धाओं में भाग लेने के लिए सुरक्षा प्रदान करना है। एआईयू सिर्फ प्रतिबंधित दवा के सेवन के संबंध ही नहीं है बल्कि स्पर्धा और उससे जुड़ी बेईमानी तथा अनैतिक प्रथाओं को रोकने के लिए जिम्मेदार है। हम कह सकते हैं कि यह संस्था एथलीट प्रतियोगिता में शामिल प्रतिभागियों के लिए हैं जो कि यह सुनिश्चित करता है कि सब कुछ निष्पक्ष हुआ है तथा आई रन क्लीन नामक शैक्षिक कार्यक्रम का संचालन करता है।
भारत की तरफ से 2025 में प्रतिबंधित दवा के सेवन व अन्य प्रकरणों में दोषी पाये गये उनमें धाविका धनलक्ष्मी फुटबालर एन. रत्नाबाला देवी, भाला फेंकने वाले गौरव पटेल, मुक्केबाज आयतवीर कारवासरा, पोलो- सिद्धार्थ शर्मा, धाविका निर्मल शेरोन, साथ ही एथलेटिक्स के दिलशाह पर 5 वर्ष, मुक्केबाज मोनिश पर 2 वर्ष, पहलवान, अंकित पर 4 वर्ष का प्रतिबंध लगाया गया है जबकि मुक्केबाज मो. हुसैन,कबड्डी के देवांक दलाल भी दोषी पाये गये हैं।
प्रतिबंधित दवा के सेवन और स्पर्धाओं में गलत तरीके अपनाने के मामले में भारत के एथलीटों की संख्या निरंतर बढ़ना बहुत ही चिंता का विषय है। 2025 की सूची में कबड्डी, मुक्केबाजी, कुश्ती, केनोई, भारोत्तोलन, बेडमिंटन, फील्ड हाकी,टेनिस, एथलेटिक्स, क्रिकेट, जुडो, सेपकतकरा, रग्बी यूनियन, जैसे खेल के प्रतिभागी शामिल हैं और ये टेस्ट रिपोर्ट किसी न किसी राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट का है। भारत को शर्मसार करने वाले ये खिलाड़ी ऐसा क्यों कर रहे हैं।
जब इस बात का अध्ययन करने पर पाया गया है कि भारत के केंद्र, राज्य सरकारों, सार्वजनिक संस्थाओं, औद्योगिक घरानों आदि के द्वारा खिलाड़ियों विजेता बनने पर राष्ट्रीय, राज्य सम्मान, नकद राशि, भूखंड , मकान, कार, शासकीय , अर्धशासकीय नौकरी आदि दी जा रही सुविधा के कारण ऐसा संभव हो पा रहा है। अभिभावक से लेकर प्रशिक्षक व खुद खिलाड़ी यह चाहते हैं कि वे अपने पैरों पर जल्द से जल्द खड़े हो सके। इसके लिए उन्हें किसी ना किसी स्पर्धा में पदक प्राप्त करके दिखाना होगा अत: वे इस तरह की बेमानी कर बैठते हैं।
भारत सरकार के खेल मंत्रालय और भारतीय खेल प्राधिकरण द्वारा प्रतिबंधित दवा के सेवन के दुष्परिणाम के बारे में हाल ही में छत्तीसगढ़ में संपन्न प्रथम खेलो इंडिया ट्रायबल गेम्स 2026 में भी प्रत्येक खेल के स्थल में ऐसी सामग्री बांटी गई व खिलाड़ियों, दर्शकों को समझाया गया। सचमुच भारत में इस तरह के गलत तरीकों का इस्तेमाल करना चिंताजनक है जिसकी रोकथाम के लिए सबको आगे आना चाहिए। प्रतिबंधित दवा से संबंधित पाठ्यक्रम को स्कूल/ कॉलेज में शामिल किया जाना चाहिए।
