असंभव को संभव में बदलने का दे रहे संदेश
मूलत: छत्तीसगढ़ के अनिमेष कुजूर विश्वस्तर पर बना रहे अपनी पहचान
आलेख : जसवंत क्लॉडियस, वरिष्ठ स्वतंत्र खेल पत्रकार, टी वी कमेंटेटर, रायपुर.
रायपुर : पिछले 47 वर्षों के खेल पत्रकारिता के दौरान मैंने अपनों के बीच एक कमी पाई है। हम अपनी उपलब्धि दूसरों को बता नहीं पाते हैं क्योंकि हम अब तक अपने आपको स्वयं का प्रवक्ता नहीं बना सके, दूसरी तरफ उपलब्धि हासिल करने वाले की संस्था खुद आगे आकर अपने प्रतिभावान व्यक्तित्व के बारे में सार्वजनिक रूप से दावे के साथ अपना पक्ष भी नहीं रख पाते हैं। मुझे लगता है उपरोक्त उल्लेख का निचोड़ बता देना ही उचित होगा। वास्तव में इस चर्चा के केंद्र में जशपुर जिले के घाट तांगर के रहने वाले विश्व प्रसिद्ध धावक अनिमेष कुजूर हैं। वे भारत में फिलहाल एथलेटिक खेल के 100 मीटर,200 मीटर और 4×100 की रिले दौड़ के विश्व विख्यात धावक के रूप में जाने जाते हैं।
छत्तीसगढ़ ही नहीं भारत के समस्त नागरिकों के लिए गर्व की बात है कि अनिमेष कुजूर ने 100 मीटर दौड़ में ग्लास्गो स्कॉटलैंड में होने वाली 2026 के राष्ट्रमंडल खेलों तथा 200 मीटर की दौड़ में जापान में होने वाली एशियाई खेलों के लिए योग्यता हासिल कर ली है। छत्तीसगढ़ शासन के पुलिस विभाग में कार्यरत अनिमेष के माता-पिता ने उन्हें 12वीं तक की शिक्षा अंबिकापुर के सैनिक स्कूल में दिलवाई। 2020 में 12 वीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने के उपरांत अनिमेष पहले तो सेना में भर्ती होकर भारतमाता की सेवा करना चाहते थे जिसके कारण अपने माता-पिता के नियुक्त स्थल कांकेर में रहकर घर के पास के मैदान में दौड़ते थे साथ ही फुटबाल भी खेला करते थे। अनिमेष के पिता अमृत कुजूर और माता जी दोनों ही छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग में कार्यरत हैं .अनिमेष को कांकेर के मैदान में दौड़ते हुए देखकर उनके साथियों ने उन्हें जिला स्तरीय या राज्य स्तरीय एथलेटिक प्रतियोगिता में भाग लेने की सलाह दी। अभिभावकों, शुभचितंकों, दोस्तों की सलाह पर अनिमेष ने 100 मीटर,200 मी. 100×4 मीटर रिले दौड़ में भाग लेना प्रारंभ किया।
आधुनिक युग में एथलेटिक्स के इवेंट आऊटडोर और इंडोर दोनों ही प्रकार के स्टेडियम में होते हैं। किसी भी खेल में एकल स्पर्धा वाले मुकाबले जीतना टीम भिड़ंत के मुकाबले अधिक महत्वपूर्ण होता है। टीम वाले खेल में 15,11,9,7,5,4 तक के साथियों में आपसी तालमेल का महत्व होता है।जबकि एकल इवेंट में परिणाम दोनों प्रतिभागियों की शक्ति,तकनीक, त्वरित निर्णय लेने की क्षमता, खेल वातावरण, मौसम आदि पर निर्भर करता है। इस प्रकार एथलेटिक्स के खिलाड़ी के लिए जरूरी है कि वह सिर्फ और सिर्फ अपनी दौड़ पर ध्यान केंद्रित करें। प्रशिक्षण के दौरान इन बातों पर विशेष ध्यान देकर प्रतिभागियों को स्पर्धा के लिए तैयार किया जाता है। कड़े परिश्रम, संतुलित आहार के साथ- साथ प्रशिक्षण के दौरान प्रत्येक खिलाड़ी को अपने जीत के प्रति मानसिक रूप से तैयार किया जाता है। कम दूरी के दौड़ जिसमें 100,200,400 मीटर के इवेंट आते हैं इसमें स्टार्ट पलक झपकते ही हो जाता है अत: ऐसे इवेंट में एकाग्रता और मूवमेंट का विशेष महत्व होता है। एथलेटिक्स में किसी चैंपियनशिप की तैयारी के लिए एक प्रशिक्षणार्थी को अपने आप पर नियंत्रण रखकर सफलता को प्राप्त करने की चुनौती होती है। विश्व स्तरीय धावक बनने के लिए आज्ञाकारी और समय का पाबंद होना भी आवश्यक है। 2 जून 2003 को जन्मे अनिमेष कुजूर को 2022 में राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर मिली सफलता ने भुवनेश्वर स्थित ओडिसा रिलायंस फाउंडेशन एथलेटिक्स हाई परफारमेंस सेंटर के कोच मार्टिन ओवंस तथा जेम्स हिलर का ध्यान अपनी ओर खींचा। उन्हें लगा कि अनिमेष में 100 व 200 मीटर के कम दूरी के दौड़ में विश्व स्तरीय धावक बनने के गुण हैं। उन्होंने तत्काल ही अनिमेष को अपने कोचिंग सेंटर के लिए चुन लिया। फिर शुरू हुआ उनका सुव्यवस्थित प्रशिक्षण का दौर जिसकी वजह से अनिमेष ने राष्ट्रीय,अंतर्राष्ट्रीय स्तर की कई स्पर्धा में पदक जीते। 2025 में विश्व एथलेटिक्स मुकाबले के लिए योग्यता हासिल करने वाले ने पहले भारतीय पुरुष हैं। गुमी में संपन्न एशियन चैंपियनशिप और ब्रिक्स गेम्स 2024 जो कजान में हुआ उसमें दोनों से अनिमेष ने कांस्य पदक जीता।फिलहाल वे भारत के 200 मी. की दौड़ के सर्वश्रेष्ठ तथा 100 मीं. के दूसरे स्थान के धावक हैं। संभवत: छत्तीसगढ़ एथलेटिक्स संघ रायपुर के जाने अनजाने में हुई त्रुटि की वजह से अनिमेष ने छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी नहीं होने का प्रमाण पत्र लेकर ओडिसा एथलेटिक्स संघ की सदस्यता ले ली है। इसका अफसोस है लेकिन अनिमेष को छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया कहने से कोई रोक नहीं सकता .
