कुनकुरी में कानून ताक पर: घरेलू सिलेंडरों के अवैध इस्तेमाल से सुलग रहा काला बाजार, गहरी नींद में सोया खाद्य विभाग!

बड़ा सवाल: होटलों की भट्टियां कैसे सुलग रही हैं? क्या खाद्य विभाग की नाक के नीचे चल रहे इस काले कारोबार में विभागीय अधिकारियों की मूक संलिप्तता है?

कुनकुरी : नगर क्षेत्र में इन दिनों नियमों को ताक पर रखकर घरेलू रसोई गैस सिलेंडरों का धड़ल्ले से व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है। विडंबना देखिए कि जिस विभाग के कंधों पर इन अवैध गतिविधियों को रोकने की जिम्मेदारी है, वह खाद्य विभाग कुंभकरणी नींद सोया हुआ है। विभाग की इसी घोर लापरवाही और अनदेखी के चलते अवैध रूप से गैस का रिफिलिंग और कमर्शियल इस्तेमाल करने वालों के हौसले सातवें आसमान पर हैं। नगर के मुख्य चौक-चौराहों से लेकर गली-कूचों तक, नियमों की धज्जियां सरेआम उड़ाई जा रही हैं और जिम्मेदार अधिकारी दफ्तरों में बैठकर किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं।

बस स्टैंड से लेकर होटलों तक सरेआम खेल, प्रशासन मौन

नगर का हृदय स्थल कहा जाने वाला बस स्टैंड क्षेत्र आज अवैध गैस सिलेंडरों का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। बस स्टैंड सहित पूरे नगर में संचालित ठेलों, फास्ट फूड सेंटरों, ढाबों और बड़े होटलों में नीले रंग के कमर्शियल सिलेंडरों की जगह बेखौफ होकर लाल रंग के घरेलू सिलेंडरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। हर तरफ सरेआम गैस चूल्हे सुलग रहे हैं, लेकिन खाद्य विभाग के अधिकारियों को यह धुआं दिखाई नहीं दे रहा। सूत्रों की मानें तो सस्ते के चक्कर में होटल संचालक गरीब जनता के हक के घरेलू कोटे पर डाका डाल रहे हैं और विभाग मूकदर्शक बनकर इस पूरे खेल को मूक सहमति दे रहा है।

हादसों को खुला निमंत्रण: बारूद के ढेर पर बैठा कुनकुरी

यह सिर्फ नियमों का उल्लंघन या वित्तीय अनियमितता का मामला नहीं है, बल्कि यह कुनकुरी की जनता की जान के साथ सीधा खिलवाड़ है। घरेलू सिलेंडरों से कमर्शियल चूल्हों को जोड़ने के लिए जिन असुरक्षित पाइपों और रेगुलेटरों का इस्तेमाल किया जा रहा है, वे कभी भी भीषण हादसे का सबब बन सकते हैं। बस स्टैंड जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में जहां हजारों लोगों की आवाजाही होती है, वहां इस तरह का अवैध उपयोग एक जिंदा बम की तरह है। यदि कोई अप्रिय घटना घटती है तो जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या तब खाद्य विभाग अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ पाएगा?

खाद्य विभाग की निष्क्रियता पर उठते गंभीर सवाल

जनता के बीच अब यह चर्चा आम हो चुकी है कि खाद्य विभाग आखिर इन होटल व्यवसायियों और ठेला संचालकों पर कार्रवाई करने से क्यों कतरा रहा है? क्या नियमित रूप से की जाने वाली औचक निरीक्षण की कागजी खानापूर्ति सिर्फ फाइलों तक सीमित है? समय-समय पर सिर्फ औपचारिकता निभाने के लिए छोटी-मोटी कार्रवाई कर इतिश्री कर ली जाती है, जबकि मुख्य सरगना और बड़े होटल संचालक साफ बच निकलते हैं।

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