साइबर ठगी के शिकार लोगों को राहत दिलाने पुलिस का बड़ा कदम, GRM-MRM पोर्टल पर रेंज स्तरीय प्रशिक्षण; 45 बैंक मैनेजर और 50+ साइबर कमांडो हुए शामिल

साइबर अपराध पीड़ितों की ठगी गई राशि शीघ्र वापस कराने GRM एवं MRM पोर्टल पर रेंज स्तरीय व्यावहारिक प्रशिक्षण आयोजित

साइबर अपराधों में पीड़ितों की ठगी गई राशि को शीघ्र सुरक्षित कर वापस दिलाने के उद्देश्य से GRM एवं MRM पोर्टल पर रेंज स्तरीय व्यावहारिक प्रशिक्षण आयोजित किया गया।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल की उपस्थिति में पुलिस अधिकारियों, साइबर कमांडो एवं बैंक अधिकारियों को त्वरित वित्तीय कार्रवाई की प्रक्रिया समझाई गई।

मुख्य वक्ता सहायक पुलिस महानिरीक्षक कवि गुप्ता द्वारा GRM पोर्टल एवं MRM मॉड्यूल के प्रभावी संचालन की व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई।

दुर्ग, बेमेतरा एवं बालोद जिले के 45 बैंक मैनेजर तथा थानों में पदस्थ 50 से अधिक साइबर कमांडो प्रशिक्षण में शामिल हुए।

साइबर फ्रॉड की राशि पर तत्काल होल्ड एवं लियन लगाने तथा न्यायालयीन प्रक्रिया से पीड़ितों को राशि वापस कराने हेतु पुलिस-बैंक समन्वय पर प्रशिक्षण दिया गया।

दुर्ग : दिनांक 24.06.2026 को दधीचि सभागार, पुलिस लाइन दुर्ग में साइबर अपराधों में पीड़ितों की शिकायतों के त्वरित निराकरण एवं ठगी गई राशि को शीघ्र वापस कराने के उद्देश्य से GRM (Grievance Redressal Mechanism) एवं MRM (Money Restoration Module) के प्रभावी संचालन हेतु रेंज स्तरीय व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई।

दुर्ग : कार्यशाला में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल की उपस्थिति रही। मुख्य वक्ता के रूप में सहायक पुलिस महानिरीक्षक कवि गुप्ता, पुलिस मुख्यालय रायपुर द्वारा उपस्थित पुलिस अधिकारियों एवं बैंक प्रबंधकों को GRM पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों के त्वरित निराकरण तथा MRM मॉड्यूल के माध्यम से साइबर ठगी की राशि पीड़ितों को वापस कराने की प्रक्रिया के संबंध में विस्तृत एवं व्यावहारिक जानकारी दी गई।

कार्यशाला में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) शोभराज अग्रवाल, नगर पुलिस अधीक्षक दुर्ग श्री हर्षित मेहर, उप पुलिस अधीक्षक (रेंज साइबर थाना) अनूप लकड़ा एवं उप पुलिस अधीक्षक (ACCU) यदुमणि सिदार सहित दुर्ग, बेमेतरा एवं बालोद जिले के 45 बैंक मैनेजर तथा थानों में पदस्थ 50 से अधिक साइबर कमांडो उपस्थित रहे।

प्रशिक्षण के दौरान साइबर अपराध की सूचना प्राप्त होने के बाद पुलिस एवं संबंधित बैंक/वित्तीय संस्थाओं के बीच त्वरित समन्वय स्थापित कर ठगी की राशि को होल्ड कराने, लियन लगाने तथा आवश्यक न्यायालयीन प्रक्रिया के माध्यम से पीड़ित को राशि वापस दिलाने की कार्यवाही के संबंध में व्यावहारिक जानकारी दी गई।

प्रशिक्षण का उद्देश्य

प्रशिक्षण का उद्देश्य साइबर अपराध की शिकायत प्राप्त होने के बाद पुलिस एवं बैंकिंग संस्थाओं के मध्य त्वरित एवं प्रभावी समन्वय स्थापित करना, ठगी की राशि को समय रहते सुरक्षित कराना तथा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पीड़ितों को राशि वापस दिलाने की कार्यवाही को अधिक व्यवस्थित एवं प्रभावी बनाना रहा।

उपस्थित अधिकारी एवं प्रतिभागी

कार्यशाला में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) शोभराज अग्रवाल, नगर पुलिस अधीक्षक दुर्ग हर्षित मेहर, उप पुलिस अधीक्षक (रेंज साइबर थाना) अनूप लकड़ा, उप पुलिस अधीक्षक (ACCU) यदुमणि सिदार सहित संबंधित पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त दुर्ग, बेमेतरा एवं बालोद जिले के 45 बैंक मैनेजर एवं थानों में पदस्थ 50 से अधिक साइबर कमांडो ने प्रशिक्षण में सहभागिता की।

सराहनीय कार्य

कार्यशाला के आयोजन में  पुलिस अधिकारियों एवं साइबर टीम द्वारा बैंकिंग संस्थाओं के अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर प्रशिक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित की गई तथा साइबर अपराधों में वित्तीय कार्रवाई को त्वरित एवं प्रभावी बनाने से संबंधित व्यावहारिक जानकारी साझा की गई।

दुर्ग पुलिस की अपील

दुर्ग पुलिस आम नागरिकों से अपील करती है कि साइबर ठगी होने की स्थिति में बिना विलंब 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं तथा संबंधित बैंक को तत्काल सूचित करें। समय पर सूचना मिलने से ठगी की राशि को होल्ड कराने की संभावना बढ़ती है। नागरिक किसी भी अज्ञात कॉल, लिंक, मैसेज या ऑनलाइन लेनदेन के संबंध में सतर्क रहें तथा बैंकिंग, OTP, PIN एवं अन्य गोपनीय जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें।

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