कुनकुरी, 22 जून 2025 — नालंदा परिसर के भूमिपूजन कार्यक्रम को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की टिप्पणी पर भाजपा नेता एवं कुनकुरी नगर पंचायत के पार्षद अमन शर्मा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि भूपेश बघेल को आदिवासी समाज के नाम पर सवाल पूछने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है, क्योंकि उनकी सरकार के कार्यकाल में आदिवासी समाज के साथ केवल दिखावटी व्यवहार किया गया।
शर्मा ने आरोप लगाया कि जब भूपेश बघेल मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने मंच से आदिवासी सम्मान की बातें जरूर कीं, लेकिन धरातल पर उनकी नीयत कुछ और थी। दुर्ग सांसद विजय बघेल का नाम शिलालेखों से हटाना, विकास कार्यों में उन्हें निमंत्रण न देना इस बात का प्रमाण है कि कांग्रेस की राजनीति आदिवासी प्रतिनिधियों को अपमानित करने की संस्कृति पर आधारित रही है। उन्होंने याद दिलाया कि सलियाटोली-बनकोम्बो मार्ग, जो पीएमजीएसवाई के तहत केंद्र की स्वीकृति से बनी थी, उसके लोकार्पण कार्यक्रम में भी भाजपा सांसद को नहीं बुलाया गया।
अमन शर्मा ने आगे कहा कि कांग्रेस शासन में भगवान बिरसा मुंडा का नाम केवल भाषणों तक सीमित रहा। उन्होंने सवाल उठाया कि भूपेश बघेल के पूरे पांच साल के कार्यकाल में बिरसा मुंडा जी के नाम पर कितनी योजनाएं शुरू की गईं? कितने स्कूल, कॉलेज, सड़कें या सांस्कृतिक केंद्र उनके नाम पर बनाए गए? और फिर उन्होंने खुद ही उत्तर दिया – “जवाब शून्य है।” उन्होंने यह भी कहा कि तेंदूपत्ता संग्राहकों की चरण पादुका योजना बंद करना, आदिवासी बहनों को साड़ी योजना से वंचित करना और सरकारी भवनों को कांग्रेस नेताओं के नाम समर्पित करना, यही कांग्रेस की आदिवासी नीति रही।
भाजपा पार्षद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा सरकार की नीति और नीयत की तुलना करते हुए बताया कि पिछले कुछ वर्षों में आदिवासी समाज को सशक्त करने के लिए कई अभूतपूर्व योजनाएं शुरू की गईं। इनमें बिरसा मुंडा जयंती पर ₹6,640 करोड़ की परियोजनाएं, 60,000 जनजातीय गांवों में उत्कर्ष अभियान, 80,000 करोड़ का निवेश, 1.5 लाख पक्के मकान, छात्रावास, सिकल सेल जांच अभियान, और 24,000 करोड़ की प्रधानमंत्री जनमन योजना जैसी योजनाएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा स्मारक संग्रहालय, जनजातीय गौरव दिवस और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी का चुनाव इन प्रयासों के जीवंत प्रतीक हैं।
अंत में अमन शर्मा ने कहा कि कांग्रेस के पास आदिवासी समाज के लिए कोई ठोस उपलब्धि नहीं है, बल्कि CGPSC जैसे घोटालों और प्रशासनिक सेटिंग-गेटिंग से आदिवासी युवाओं के अधिकार भी छीने गए। उन्होंने भूपेश बघेल को नसीहत दी कि आदिवासी गौरव मंच पर टोपी पहनने से नहीं, बल्कि नीति, नीयत और निष्ठा से आता है – जो भाजपा ने करके दिखाया है।
