सामुदायिक वन अधिकार पत्र के 6209 प्रकरणों में मिली साढ़े 24 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल के उपयोग की मिली मंजूरी जगदलपुर : छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में अनुसूचित जनजातियों और अन्य पारंपरिक वन निवासियों को एक बड़ी सौगात मिली है, जब हजारों परिवारों को उन्हें उनके पारंपरिक काबिज वन भूमि का अधिकार प्रदान किए गए हैं। यह कदम न केवल आदिवासी समुदायों की आजीविका को मजबूत कर रहा है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में भी एक मील का पत्थर साबित हो रहा है। अनुसूचित जनजाति और अन्य…
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वनाधिकार क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ की अग्रणी भूमिका—वन विभाग की सशक्त प्रतिबद्धता का प्रमाण
छत्तीसगढ़ वन विभाग का संकल्प: परंपरागत ज्ञान और कानूनी अधिकारों के समन्वय से सतत वन प्रबंधन रायपुर 3 जुलाई 2025/ छत्तीसगढ़ वन विभाग ने अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वनवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 के तहत व्यक्तिगत और सामुदायिक दोनों प्रकार के वन संसाधन अधिकारों की मान्यता एवं वितरण में देश के अग्रणी राज्यों में रहते हुए सक्रिय, सकारात्मक और सराहनीय भूमिका निभाई है। अब तक प्रदेश में 4,78,641 व्यक्तिगत अधिकार तथा 4,349 सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (CFRR) पत्र वितरित किए गए हैं, जिससे कुल 20,06,224 हेक्टेयर क्षेत्र…
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