“गाली वाली कांग्रेस” पर भाजपा का प्रहार – संबित पात्रा बोले, राहुल गांधी ने मर्यादा तोड़ी, बिहार की जनता देगी जवाब

दरभंगा की सभा में माननीय प्रधानमंत्री जी और उनकी स्वर्गीय माता जी के लिए जिस प्रकार की अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया, उसके मूल में स्वयं राहुल गांधी हैं। यदि उनके हाल के भाषणों का विश्लेषण किया जाए तो स्पष्ट होता है कि पिछले कई दिनों से वे प्रधानमंत्री को ‘तू’ कहकर संबोधित कर रहे हैं, जो मर्यादा की पूरी तरह अवहेलना है।

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कभी कांग्रेस का नारा था- “गली-गली कांग्रेस”, पर आज वही पार्टी “गाली वाली कांग्रेस” बन गई है।

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बिहार की वही पावन भूमि, जहाँ चाणक्य जैसे नीति-निर्माता हुए, बुद्ध जैसे विश्वगुरु प्रकट हुए, और जहाँ से भाषा, ज्ञान और संस्कृति की धारा पूरे विश्व में प्रवाहित हुई—आज उसी बिहार की जनता राहुल गांधी की भाषा को देख-परख रही है और निश्चित ही उसका उत्तर भी देगी।

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कांग्रेस के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग कोई नई बात नहीं है। संसद सत्र के दौरान पूरे राष्ट्र ने देखा कि कांग्रेस सांसद वेल में खड़े होकर लगातार ‘चोर, चोर’ के नारे लगा रहे थे। स्थिति इतनी गंभीर हुई कि लोकसभा अध्यक्ष को स्वयं यह कहना पड़ा कि भाषा की मर्यादा चकनाचूर हो गई है।

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जबसे कांग्रेस पार्टी ने नरेंद्र मोदी जी में एक संभावित और प्रभावी नेता देखा है, तभी से वह लगातार उनके प्रति अमर्यादित शब्दों का प्रयोग करती आ रही है।

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सवाल यह है कि पूरे विश्व के लोकतांत्रिक देशों में कहाँ यह परंपरा है कि राष्ट्राध्यक्ष को ‘नाली का कीड़ा’, ‘कॉकरोच’, ‘मौत का सौदागर’ जैसे अपमानजनक शब्दों से संबोधित किया जाए? और इसके बाद वही लोग यह कहते हैं कि देश में तानाशाही चल रही है। यदि इतनी गालियाँ देने के बाद भी विपक्ष को लोकतंत्र नहीं दिखता, तो फिर उनके लिए लोकतंत्र की परिभाषा क्या है?

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आज राहुल गांधी स्वयं कांग्रेस के नए मणिशंकर अय्यर बन गए हैं। दरअसल, कांग्रेस पार्टी में मणिशंकर अय्यर के जाने के बाद एक ऐसे ही व्यक्ति की कमी थी, और उस रिक्त स्थान को राहुल गांधी ने स्वयं भर दिया है।

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गाली की यह राजनीति केवल प्रधानमंत्री तक सीमित नहीं है। भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में लगभग हर संवैधानिक संस्था विपक्ष के ऐसे हमलों का शिकार हुई है। खुद राहुल गांधी सेना प्रमुख को ‘सड़क का गुंडा’ कह चुके हैं।

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यही नहीं, राहुल गांधी ने चुनाव आयोग को ‘चोर’ कहा, प्रधानमंत्री को ‘चोर’ कहा, सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ टिप्पणी की, ईवीएम को चोर बताया, यहाँ तक कि सीबीआई और ईडी जैसी संस्थाओं को भी ‘चोर’ कहा। राहुल गांधी की सोच के अनुसार मानो इस देश में सब ‘चोर’ हैं, बस वही लोग सही हैं जो स्वयं जमानत पर बाहर हैं।

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नई दिल्ली-रायपुर, 28 अगस्त 2025 : भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं लोकसभा सांसद डॉ. संबित पात्रा ने आज केंद्रीय कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की बिहार यात्रा के दौरान आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के संबंध में प्रयोग की गई अभद्र भाषा की कड़ी आलोचना की। डॉ. पात्रा ने कहा कि दरभंगा की सभा में माननीय प्रधानमंत्री जी और उनकी स्वर्गीय माता जी के प्रति जिस प्रकार की अभद्र और अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया गया, उसके मूल में स्वयं राहुल गांधी हैं। यदि उनके हालिया भाषणों का विश्लेषण किया जाए तो यह स्पष्ट होता है कि वे पिछले कई दिनों से प्रधानमंत्री को ‘तू’ कहकर संबोधित कर रहे हैं, जो शिष्टाचार और राजनीतिक मर्यादा की सीधी अवहेलना है। कांग्रेस पार्टी ने जबसे आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को एक संभावित और प्रभावी नेता के रूप में स्वीकार किया है, तभी से वह लगातार उनके प्रति अमर्यादित भाषा का प्रयोग करती आ रही है।

डॉ. पात्रा ने कहा कि बिहार में राहुल गांधी की यात्रा के दौरान जिस प्रकार की भाषा का प्रयोग किया जा रहा है, वह अत्यंत दुखद है। लोकतंत्र में संवाद और असहमति के अपने आदर्श होते हैं। सुषमा स्वराज जी के वे शब्द आज भी स्मरणीय हैं, जब उन्होंने सदन में कहा था कि “हम शत्रु नहीं, बल्कि वैचारिक रूप से विरोधी हैं।“ उन्होंने कहा कि आज स्थिति चिंताजनक है, क्योंकि भाषा की मर्यादा लगातार तार-तार हो रही है। माननीय प्रधानमंत्री जी और लगभग सौ वर्ष की आयु में दिवंगत उनकी माता जी के प्रति जिस तरह की कटु, अश्लील और अभद्र भाषा का प्रयोग की गयी, वह अत्यंत निंदनीय है। डॉ. पात्रा ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि जिस पार्टी ने कभी अपने आप को स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ा और जिसे महात्मा गांधी जी की पार्टी कहा जाता था, वही आज ‘गाली वाली पार्टी’ बन गई है। यह वह तथाकथित नकली गांधी परिवार की पार्टी है, जिसमें अधिकार-बोध और अहंकार कूट-कूट कर भरा हुआ है। उन्हें ऐसा लगता है मानो भारतवर्ष पर केवल उनका ही अधिकार हो। यदि उन्हें राजनीतिक सत्ता नहीं मिलती, तो वे लोकतांत्रिक रूप से चुने गए नेताओं से गद्दी छोड़ने की माँग करते हैं। और जब सत्ता हाथ नहीं आती, तो वे को जो लोकतांत्रिक रूप से चुन हुए व्यक्ति पर व्यक्तिगत और अपमानजनक भाषा तक का प्रयोग करने से नहीं चूकते। यहां तक कि उसे मां की गाली भी दे सकते है।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. पात्रा ने कहा कि बिहार वह धरती है, जहां से चाणक्य का जन्म हुआ, जहां से भगवान बुद्ध का संदेश प्रसारित हुआ, जहां से भाषा, ज्ञान और संस्कृति की धारा प्रवाहित हुई। आज उसी बिहार की जनता राहुल गांधी की भाषा को देख रही है, उसे परख रही है और समय आने पर उसका उत्तर भी देगी। और, इस अभद्र भाषा की प्रवृत्ति के मूल जनक स्वयं राहुल गांधी ही हैं। दरभंगा की सभा में मंच से जिस प्रकार माननीय प्रधानमंत्री जी और उनकी माता जी के बारे में कहा गया, उसके पीछे भी राहुल गांधी का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है। यदि उनके हालिया भाषणों का विश्लेषण किया जाए, तो पता चलता है कि पिछले कई दिनों से वे प्रधानमंत्री को ‘तू’ कहकर संबोधित कर रहे हैं, जैसे — “तू युद्ध बंद कर दे, 24 घंटे का समय दिया गया है, नहीं तो तुझे छोड़ा नहीं जाएगा, तुझे हम देख लेंगे।” उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को यह समझना चाहिए कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी 140 करोड़ भारतीयों के प्रधानमंत्री हैं। इस प्रकार की भाषा किसी भी दृष्टि से उचित नहीं कही जा सकती। भारतवर्ष सदैव संवाद की मर्यादा का सम्मान करता है और अभद्र, अमर्यादित भाषा को कभी स्वीकार नहीं करता।

डॉ. पात्रा ने कहा कि दुर्भाग्यवश यह पहली बार नहीं है। हाल ही में संसद के सत्र में जिस तरह के नारे लगाए गए — “चोर, चोर, चोर” — और कांग्रेस सदस्यों ने वेल में खड़े होकर जिस प्रकार व्यवहार किया, उसकी ओर स्वयं लोकसभा अध्यक्ष ने भी अंतिम दिन सदन स्थगित करते समय भाषा की मर्यादा के तारतार होने का जिक्र किया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस द्वारा आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के लिए अपमानजनक भाषा के प्रयोग की यह परंपरा नई नहीं है। यह सिलसिला 2012-13 से ही चला आ रहा है। जबसे कांग्रेस ने माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जी को एक संभावित और प्रभावी नेता के रूप में देखा है, तबसे वह लगातार उनके लिए अमर्यादित और अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करती रही है। “मौत का सौदागर, नाली का कीड़ा, नीच आदमी, कॉकरोच, वायरस, भस्मासुर, रावण, दुर्योधन” जैसे शब्द भी कांग्रेस नेताओं द्वारा उनके लिए कहे जा चुके हैं।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. पात्रा ने कहा कि यह कैसी राजनीतिक संस्कृति और वातावरण है, जिसे कांग्रेस पार्टी भारत में स्थापित करना चाहती है? वे कहते हैं कि भाजपा की सरकार में हिटलरशाही और तानाशाही है। परंतु प्रश्न ये है कि दुनिया के किस लोकतांत्रिक देश में राष्ट्राध्यक्ष के लिए ‘नाली का कीड़ा’, ‘कॉकरोच’, ‘वायरस’, ‘मौत का सौदागर’ जैसे अपमानजनक शब्दों का प्रयोग होता है और फिर वही लोग इसे हिटलरशाही बताते हैं! सोचिए, जब इतनी गालियाँ देने के बाद भी उन्हें लोकतंत्र में तानाशाही दिखाई देती है, तो उनके हिसाब से लोकतंत्र का मतलब केवल विरोधी मरना ही बाकी रह जाएगाएक बार तो नारे तक लगाए गए थे— “मोदी मर जा तू।” यह नारे एयरपोर्ट पर बैठे कुछ नेताओं ने दिए थे।

डॉ पात्रा ने कहा कि आज राहुल गांधी, मणिशंकर अय्यर और संजय राउत की भाषा में कोई अंतर नहीं रह गया है। इंडी गठबंधन में मानो यह प्रतिस्पर्धा चल रही है कि राहुल गांधी संजय राउत जैसे बन सकते हैं या नहीं। वास्तव में राहुल गांधी, कांग्रेस पार्टी के नए मणिशंकर अय्यर बन चुके हैं। अय्यर जी के दौर की समाप्ति के बाद जो खाली स्थान था, उसे राहुल गांधी ने स्वयं भर दिया है।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. पात्रा ने आगे कहा कि  दुर्भाग्य से आज गाली की राजनीति केवल प्रधानमंत्री तक सीमित नहीं है। कांग्रेस और विपक्ष ने लगभग सभी संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाया है। राहुल गांधी और कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट तक को सड़कों पर घसीटा गया, न्यायाधीशों पर आरोप लगाए गए और फैसलों पर पक्षपात का ठप्पा लगाया गया— यह सीधे-सीधे सुप्रीम कोर्ट पर हमला है। इसी प्रकार आज चुनाव आयोग को भी रोज अग्निपरीक्षा से गुजरना पड़ता है, क्योंकि हर बार उनके (राहुल गांधी) द्वारा आयोग पर आए दिन आधारहीन आरोप लगाए जाते हैं। जो मुद्दे शिकायत दर्ज करने की जगह उठने चाहिए, उन्हें सड़कों पर उछाला जाते हैं। सेना प्रमुख को भी राहुल गांधी ‘सड़क का गुंडा’ कह चुके हैं। सीबीआई और ईडी तक को कांग्रेस ने “चोर” बताया। डॉ पात्रा ने कहा कि राहुल गांधी ने हर संवैधानिक प्राधिकरण के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। चुनाव आयोग कोचोरकहा, प्रधानमंत्री कोचोरकहा, सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ बयान दिए, ईवीएम कोचोरकहा, सीबीआई, ईडी इन सभी संस्थाओं को चोर बताया। राहुल गांधी के अनुसार— सब चोर हैं, बस जो बेल पर बाहर हैं, वही सही हैं।

डॉ. पात्रा ने कहा कि  कभी कांग्रेस का नारा था— “गली-गली कांग्रेस”, पर आज वही पार्टी “गाली वाली कांग्रेस” बन गई है। राहुल गांधी को लगता है कि गाली देकर वे आगे बढ़ सकते हैं, लेकिन न कोई कभी गाली से राजनीति में आगे बढ़ा है और न आगे बढ़ पाएगा। भाषा की मर्यादा के विषय पर राहुल गांधी से माफी की अपेक्षा नहीं है क्योंकि वो माफी नहीं मांगेंगे। राहुल गांधी को माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को गाली देकर एक प्रकार का सुख मिल रहा है, लेकिन जनता इसे सुखद नहीं मान रही है। बिहार की जनता इसका जवाब देगी।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. पात्रा ने आगे कहा कि  राहुल गांधी वही व्यक्ति हैं जिन्होंने सदन में कहा था कि जनता यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को “डंडों से मारेगी।” लेकिन माननीय प्रधानमंत्री जी ने उसी समय मुस्कुराकर जवाब दिया था कि “कहा जा रहा है कि मुझे डंडे से मारा जाएगा, कोई बात नहीं। मैं सूर्य नमस्कार की संख्या बढ़ा दूंगा, ताकि मेरी कमर इतनी मजबूत हो जाए कि अगर डंडा भी पड़े तो टूटे नहीं।” यही एक सच्चे नेता का व्यवहार है। एक रास्ता राहुल गांधी ने चुनी है और एक आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने,श्री नरेन्द्र मोदी जी  ने मर्यादा का मार्ग चुना है और जीत हमेशा मर्यादा की ही होती है।

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